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खेल

पवारः मेरा परिवार आईपीएल बोली में शामिल नहीं

केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने इस बात से इनकार किया है कि उनके परिवार की पुणे फ्रैंचाइज़ी की बोली में कोई हिस्सेदारी है. भारतीय मीडिया में इस तरह की खबरें हैं कि पवार की बेटी पुणे फ्रैंचाइज़ी की बोली में शामिल थीं.

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शरद पवार का कहना था कि सिटी कॉर्पोरेशन की बोली में उनका या उनके परिवार का कोई हिस्सा नहीं था. पुणे फ्रैंचाइज़ी की बोली के दौरान सिटी कॉर्प ने भी बोली लगाई थी लेकिन फ्रैंचाइज़ी सहारा को मिली.

शरद पवार का कहना था कि सिटी कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक ने फ्रैंचाइज़ी ख़रीदने के लिए व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर कोशिश की थी इसमें उनके परिवार का कोई व्यक्ति शामिल नहीं है.

रिपोर्टें थी कि इस कंपनी में पवार के परिवार के शेयर हैं. पवार ने कहा, "मैंने पहले भी कहा है कि न तो मैं न ही मेरे परिवार के किसी भी आईपीएल टीम की बोली में शामिल थे. मैं यही फिर से कहता हूं."

पुणे स्थित इस कंपनी में पवार के काफी शेयर बताए जाते हैं लेकिन बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष पवार ने ज़ोर देकर कहा है कि कंपनी के प्रबंध निदेशक अनिरुद्ध देशपांडे को उनके बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स ने अनुमति दी कि वह व्यक्तिगत क्षमता के हिसाब से बोली में शामिल हों. "हम इस बोली की प्रक्रिया में शामिल नहीं थे. रिपोर्ट में भी देशपांडे ने अपनी बात पूरी तरह से साफ कर दी थी. 16 और 17 को हुई सिटी कॉर्पोरेशन की बोर्ड मीटिंग में फैसला लिया गया कि वह बोली में शामिल नहीं होगी. लेकिन प्रबंध निदेशक बोली में हिस्सा लेना चाहते थे इसलिए उन्हें निजी क्षमता के मुताबिक इसमें शामिल होने की अनुमति दी गई."

किस महीने में बैठक हुई थी ये बताए बग़ैर शरद बवार ने कहा, "बोर्ड के प्रस्ताव में ये बिलकुल साफ लिखा गया था कि देशपांडे के अलावा बोली में किसी और हिस्सेदार की कोई भागीदारी नहीं होगी." पवार ने बोली शामिल होने की ख़बरों से सरासर इनकार किया और कहा कि अगर उन्होंने अपने प्रभाव का उपयोग किया होता तो बोली कभी सहारा के हाथ में नहीं जाती. "देशपांडे, महाराष्ट्र क्रिकेट असोसिएशन और मुंबई की आकृति ने पुणे के लिए बोली लगाई थी. न तो देशपांडे ये बोली जीत सके न ही उनके साथी. कोशिश उन्होंने की थी लेकिन वे जीते नहीं. मैंने अगर अपना प्रभाव इस्तेमाल किया होता तो क्या आपको लगता है कि बोली वो हारते."

पवार ने एक बार फिर कहा है कि आईपीएल में कोई भ्रष्टाचार नहीं है और मिल्कियत को लेकर भी सब साफ है. "भ्रष्टाचार नहीं है. सरकारी एजेंसियां जांच कर रही हैं. अगर किसी ने कुछ गलत किया तो उसे सज़ा मिलेगी. जांच एजेंसियां इसकी देखरेख करेंगी."

पहले भी भारतीय मीडिया में शरद पवार के दामाद सदानंद सुले और कांग्रेस की सांसद सुप्रिया सुले की मल्टी स्क्रीन मीडिया में दस फ़ीसदी की हिस्सेदारी की रिपोर्टें छपी थीं और ये बात भी उठी थी कि जब इतने लोगों की जांच हो रही है तो शरद पवार से पूछताछ की जानी चाहिए.

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा मोंढे

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