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दुनिया

परिवार लड़ेगा जिहादी सोच से

कट्टरपंथी इस्लाम की ओर झुके युवाओं को फेमिली काउंसलिंग के जरिए फिर से समाज की मुख्यधारा में लाने की जर्मनी में कोशिश की जा रही है. जल्द ही यह तरीका इंग्लैंड सहित कई अन्य देशों में भी आजमाया जाएगा.

जर्मनी, इंग्लैंड सहित कई यूरोपीय देशों से युवा मुस्लिमों के जिहाद पर जाने की खबरें बार बार सामने आ रही हैं. इसी सप्ताहांत जर्मनी के वुपर्टाल में कुछ युवाओं ने शरिया पुलिस लिखा हुआ जैकेट पहन कर परेड की और लोगों को शराब पीने से रोका.

कट्टरपंथ की ओर झुका ऐसा ही एक युवा जिहाद के लिए निकला. उसने मिस्र में जिहादियों के बने कई ट्रेनिंग कैंपों में शिरकत की. कुछ दिन वह अपने परिवार को ईमेल भेजता रहा. लड़के के गायब होने के बाद परिवार ने बर्लिन के एक परामर्श संगठन हयात से संपर्क किया. वहां सदस्य परिवार के साथ बैठे, हर ईमेल पढ़ी और उन्हें ईमेल के जवाब में सही शब्द चुनने में मदद की.

डानियल कोएलर हयात के सदस्य हैं. वह जानते हैं कि कैसे कट्टरपंथी शिविरों में ट्रेनर काम करते हैं. वे बताते हैं कि कैंपों में पहुंचे युवाओं से क्या कहा जाता है, "तुम्हारा परिवार भी तुम्हें और तुम्हारी विचारधारा को स्वीकार नहीं करेगा. वह कोशिश करेगा कि तुम्हें यहां से किसी तरह बाहर निकाला जाए." ऐसा कह कर उनके दिमाग में भरा जाता है कि उनका अपना परिवार भी उनका दुश्मन है.

हयात की नीति थी कि इस मामले में परिवार कट्टरपंथी एजेंडा के मुताबिक काम नहीं करेगा. सीधी टक्कर से बचने की कोशिश की गई. बहुत धीरज के साथ परिवार ने बातचीत का प्रस्ताव रखा. जब उनके लड़के को कट्टरपंथी कार्रवाई के बारे में शंका पैदा हुई तो परिवार ने उसे किसी और देश में आराम करने की सलाह दी. वह युवक सच में आतंकी शिविर से दूर उस देश में गया. उसने अपना परिवार बनाया और फिर से अपने माता पिता से संपर्क किया.

सफलता

हयात के कारण कट्टरपंथ की ओर झुके युवा मुसलमानों को फिर से समाज की मुख्यधारा में लाया जा सका. 2011 से यह प्रोग्राम जर्मनी में चल रहा है. अरबी शब्द हयात का मतलब जीवन होता है. यहां काम करने वाले मुट्ठी भर लोग माता पिता, बच्चों, स्कूल, इमाम सभी के साथ बातचीत करते हैं. जरूरत पड़ने पर पुलिस और सरकारी दफ्तरों से भी संपर्क करते हैं. काउंसलर कोएलर बताते हैं, "हयात में हम पूरे परिवार के साथ काम करते हैं. और उन सभी से जो उस खास व्यक्ति से अच्छे से जुड़ा है." उनका कहना है कि कट्टरपंथी विचारधारा के जवाब में परिवार को मजबूत होना जरूरी है.

हयात के जरिए पिछले कुछ साल में कई दर्जन लोगों को मदद मिल सकी. कुछ लोग तो कट्टरपंथ से पूरी तरह बाहर आ गए. जबकि कुछ का कट्टरपंथ की ओर झुकाव कम किया गया. इस समूह के पास मदद के लिए आने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

जल्द ही इस तरकीब का इस्तेमाल इंग्लैंड, ऑस्ट्रिया, कनाडा फ्रांस या स्वीडन में भी किया जा सकता है. इस तरह की सुविधा इन देशों में अभी तक नहीं है. दूसरे देशों को उम्मीद है कि बर्लिन की हॉटलाइन सिर्फ जर्मन में ही नहीं, बल्कि तुर्की, अरबी, इंग्लिश सहित कई भाषाओं में शुरू होगी. हालांकि यह फिलहाल संभव नहीं है क्योंकि हयात को धन आप्रवासन और शरणार्थी मामलों के मंत्रालय से मिलता है. इन्हें मिलने वाली आर्थिक मदद जर्मन जनता के कर से की जाती है. इसलिए इसे फिलहाल सिर्फ जर्मन नागरिकों के लिए ही बनाया गया है. कोएलर ने बताया, "यह तो साफ था कि संसाधनों की नजर से भी हम इस स्थिति में नहीं थे कि हम वैश्विक परिवार सलाह केंद्र शुरू कर सकें." इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विचार पैदा हुआ.

अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह प्रोग्राम शुरू होता है तो निश्चित ही यह नेटवर्क और इससे मिलने वाली मदद जिहाद और कट्टरपंथ का हल साबित हो सकेगी.

रिपोर्टः क्लाउस यानसन/आभा मोंढे

संपादनः ईशा भाटिया

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