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मंथन

परिंदों की दुनिया दिखाएगा विक्टर

आकाश में ऊंची उड़ान भरते पंछियों की दुनिया, इंसान के लिए अब भी रहस्य है. वो क्या करते हैं, दुनिया को कैसे देखते हैं, इसी को समझने के लिए एक पर्यावरण कार्यकर्ता ने बाज की मदद ली.

आइफिल टावर से डाइव और हवा से पैरिस का दिलचस्प नजारा. सी ईगल विक्टर तीन सौ मीटर ऊपर से डाइव लगाता है. उसके पंखों के बीच लगा मिनी कैमरा ऊपर से पैरिस का दीदार कराता है.

एक मिनट सैंतीस सेकंड की उड़ान के बाद कैमरा ड्रोन बना विक्टर अपने ट्रेनर याक ओलिविए ट्रावेए की बाहों में लौट आता है. विक्टर लेक जिनेवा के पास बने चिड़ियाघर में रहता है. यहां डेढ़ सौ परिंदों ने शरण ली है. इस वाइल्ड लाइफ पार्क में रहने वाले ज्यादातर परिंदों की तरह विक्टर भी एक चिड़ियाघर में बड़ा हुआ.

दर्दभरी कहानी

ट्रावेए ने विक्टर को कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में खोजा और छह हजार यूरो में खरीदा. उन्होंने विक्टर को नई जिंदगी दी, "जब हमने इसे लिया तो ये चार साल का था. ये पिंजरे से कभी बाहर नहीं निकला था. इसे मैंने उड़ना सिखाया. ऐसे पंछी का चिड़ियाघर में कैद रहना बहुत बुरा है. ये एक जगह से दूसरी जगह कूदता तो था लेकिन उड़ने के लिए थर्मल लिफ्ट, हवा और कलाबाजी की जरूरत पड़ती है. आम तौर पर ये चीजें पंछी अपने मां बाप से सीखते हैं."

कुछ साल पहले ट्रावेए के दिमाग में ईगल टीवी नाम का प्रोजेक्ट था. इस कैमरे का वजन सिर्फ साठ ग्राम है. एक मिनी रकसैक के सहारे इसे बाज पर बांधा जाता है. आज वो लेक जिनेवा के पास शूटिंग के लिए जा रहे हैं. विक्टर को अपनी गर्दन पर कैमरा लगाया जाना पसंद नहीं. यह आम बात है. बाजों को बंधन पसंद नहीं. कैमरा निकालना आसान होता है लेकिन उसे फिट करना विक्टर को पसंद नहीं. बहरहाल कैमरा फिट होने के बाद विक्टर आराम से कार की डिक्की में लगे अपने पिंजरे में चला जाता है. ट्रेनर ट्रावेए के मुताबिक नए नए टूर करने में विक्टर को मजा आता है.

विक्टर की उड़ान

आज की मंजिल आ गई. अब विक्टर की बारी है. धीरे धीरे बाज जंगल के ऊपर से उड़ता हुआ गांव को पार करने जा रहा है. कैमरा भी शानदार ढंग से काम कर रहा है. और कुछ ही देर बाद विक्टर लौट आया, उसे पता है कि ट्रेनर के हाथ में चिकन का टुकड़ा उसी के लिए है. बहुत पास आने के बाद वो ट्रेनर को पुकारने लगता है. ट्रावेए कहते हैं, "ये जंगली जीव है. ये इंसान से प्यार नहीं करते. लेकिन ये मुझ पर भरोसा करता है. वो जानता है कि ये एक अभ्यास है और अगर उसने अच्छा किया तो उसे इनाम मिलेगा. लेकिन ये हर बार बहुत अच्छे से नहीं होता. कभी कभी वो दूर ही उड़ता रहता है. आखिरकार वो जंगली जीव ही तो है."

शाम को ट्रावेए विक्टर की बनाई नई फिल्म देखते हैं. नजारा गजब का है.एक फ्रेंच संगठन इन फिल्मों की मदद से खतरे में पड़े पंछियों की मदद भी करना चाहता है. विक्टर और ट्रावेए इसमें मदद कर रहे हैं. दोनों ने साथ मिलकर यूरोप की सबसे ऊंची चोटी मो ब्लां का नजारा भी कैद किया है. इसमें कई घंटे लगे. इस दौरान जमीन पर खड़े एक कैमरामैन ने लगातार विक्टर पर नजर रखी.

हीरो विक्टर

उड़ान के बाद विक्टर स्कीईंग करते अपने ट्रेनर के पास पहुंच गया. अब तक विक्टर ने कोई कैमरा नहीं खोया है, सिर्फ एक बार ऐसा हुआ जब कैमरा हल्का से टूटा. ट्रावेए अक्सर कुछ नई कोशिश करते हैं और इसमें उनका दोस्त विक्टर भी बखूबी साथ निभाता है.

ट्रावेए की नई डॉक्यूमेंट्री फिल्म फ्रीडम में विक्टर हीरो है. फिल्म के जरिए विक्टर अपनी कहानी दुनिया को बताएगा. उम्मीद है कि लोगों को विक्टर की ये फिल्म पसंद आएगी और खतरे का सामना करते परिंदों के प्रति उनकी पहल नई उड़ान भरेगी.

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