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दुनिया

परदादाजी गायब जापान में

जापान में एक से एक जीने वाले पाए जाते हैं, वे सौ सौ साल तक, या उससे भी ज्यादा जीते हैं. लेकिन ऐसे 2 लाख 30 हजार लोगों का पता नहीं चल रहा है. अब इस पहेली को सुलझाने की कोशिश की जा रही है.

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शुक्रवार को जापान के विधि मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि जांच से पता चला है कि सौ से अधिक की उम्र वाले 2 लाख 30 हजार लोग अपने दर्ज पते पर नहीं पाए गए. इनमें से 884 लोगों की उम्र तो 150 से अधिक होनी चाहिए. पारिवारिक रजिस्टरों की जांच से यह पता चला है.

जापान इस बात के लिए मशहूर है कि वहां लंबी जिंदगी पाने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है. लेकिन 150 साल तक? यह सवाल उठने के बाद पाया गया कि इनमें से अनेक लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन परिवार के लोग इसे छिपाते रहे हैं.

इस बीच सारे देश में इस पर भी बहस छिड़ गई है, कि अगर वे जी रहे हैं, तो किस हालत में. साथ ही यहां व्यापक स्तर पर धोखाधड़ी भी चल रही है, मृतकों के नाम पर पेंशन लिए जा रहे हैं. जहां धोखाधड़ी नहीं हुई है, वहां भी अक्सर ऐसे लोगों को अकेले अपने हाल पर छोड़ने के मामले सामने आये हैं. हाल में ओसाका की एक 58 वर्षीय महिला ने स्वीकार किया था कि उन्होंने पांच साल तक अपने पिता की लाश छिपाकर रखी थी.

मंत्रालय का कहना है कि इन तथाकथित लापता लोगों में से अनेक की मौत द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ही हो चुकी थी. बहुतेरे अपने इलाके को छोड़कर और कहीं चले गए हैं, लेकिन नागरिकों की स्थानीय तालिका में अब भी उनके नाम दर्ज हैं.

मंत्रालय ने स्थानीय दफ्तरों को हिदायत दी है कि 120 से अधिक की उम्र वाले लोग अगर न मिले, तो उनका नाम तालिका से काट दिया जाए. अब तक की तालिका के अनुसार 77 हजार से अधिक लोगों की उम्र 120 से ऊपर होनी चाहिए.

जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जुलाई में एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसके अनुसार वहां महिलाएं औसतन 86.44 वर्ष और पुरुष 79.59 वर्ष तक की उम्र पाते हैं. लापता लोगों का नाम तालिका से हटा देने के बाद भी इस आंकड़े में कोई उल्लेखनीय अंतर नहीं आने वाला है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उभ

संपादन: महेश झा

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