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मंथन

पब्लिक के लिए हल्के, सस्ते ड्रोन

फीचर फिल्म हों, इश्तिहार या म्यूजिक वीडियो, हवाई तस्वीरें इन सभी को दिलचस्प बना देती हैं. आम तौर पर इसके लिए हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करना होता है, जो बहुत महंगा पड़ता है. लेकिन अब बाजार में ड्रोन आ गए हैं, सस्ते और हल्के.

आम तौर पर ऊपर से ली गई तस्वीर, ड्रोन कैमरे की मदद से अब ऐसे शॉट लेना बहुत आसान हो गया है. पहले क्रेन और हेलिकॉप्टर के बिना ये मुमकिन नहीं था. एशिया में सस्ते प्रोसेसर और सेंसर मिलते हैं, जिनसे ड्रोन बनाना आसान और सस्ता हो गया है. और यही वजह है कि हैम्बर्ग की ड्रोन कंपनी के लिए भी कारोबार का नया रास्ता खुल गया है. हैम्बर्ग की कंपनी कूपरकॉप्टर के प्रमुख रानिल बायर कहते हैं, "इस आधुनिक तकनीक के बिना, चीन से सस्ती टेक्नोलॉजी या रूस से सस्ती रॉकेट तकनीक के बिना, यह इतने सस्ते में संभव नहीं था और आम लोगों के लिए तो बिलकुल भी नहीं."

कैसा वीडियो चाहिए, इस आधार पर ड्रोन चुना जाता है, महंगे ऑप्टोकॉप्टर या छोटे क्वार्डोकॉप्टर. क्वार्डोकॉप्टर में पेशेवर कैमरे नहीं लादे जा सकते. लेकिन ये ज्यादा लचीले और तेज होते हैं. इनमें अक्सर लगता है ग्रोप्रो कैमरा. पेशेवर और गैर पेशेवर दोनों ही तरह के लोग आम तौर पर इन गोप्रो कैमरों का इस्तेमाल करने लगे हैं. बायर इसकी वजह बताते हैं, "जब हम गोप्रो कैमरा इन छोटे ड्रोनों में लगाते हैं, तो इससे बेहतर फोटोग्राफी हो सकती है. यह एक बड़ा फायदा है. हम बड़े दायरो को कवर कर सकते हैं."

उड़ान से पहले

एक घंटे की उड़ान के लिए पांच घंटे से भी ज्यादा की तैयारी करनी पड़ती है. फिर भी यह एक मुनाफे का कारोबार है क्योंकि हेलिकॉप्टर के लिए एक घंटे का किराया एक हजार यूरो यानी अस्सी हजार रुपये से ज्यादा देना पड़ता है. ये सस्ते ड्रोन बर्लिन के श्टेफान फोएर्सटर जैसे शौकिया ड्रोनबाजों के लिए बहुत अच्छे हैं. पिक्चर क्वालिटी परफेक्ट तो नहीं होती लेकिन उनका मकसद तो मजा करना है. उनका शौक नए हवाई रास्ते खोजना और नई जगहों को तलाश करना है. ये छोटे ड्रोन स्मार्टफ़ोन या टैबलेट कंप्यूटर से आसानी से कंट्रोल हो सकते हैं.

शौकिया ड्रोन कंट्रोलर श्टेफान फोएर्सटर कहते हैं, "मुझे बहुत अच्छा लगता है कि इसे संभालना आसान है, कि यह बहुत सिम्पल है मुझे यह भी पसंद है कि यह एक मॉड्यूलर सिस्टम है और इसे उड़ाने के लिए आपको बहुत ज्यादा अनुभव की जरूरत नहीं होती."

बढ़ रहा व्यापार

ड्रोन कारोबार तेजी से फैल रहा है. फ्रांसीसी कंपनी पैरट अपने कैमरा की क्वालिटी बेहतर करना चाहती है. उनका हाइब्रिड मॉडल रोलिंग स्पाइडर लुढ़कते लुढ़कते या उड़ते उड़ते तस्वीरें ले सकता है. बाजार में इस तरह के ड्रोन 300 यूरो यानी 20-25 हजार रुपये में मिल सकते हैं.

श्टेफान को अपना सिम्पल ड्रोन पसंद है. इसके हर पुर्जे को बदला जा सकता है. शौकिया ड्रोन उड़ाने वालों के लिए ज़्यादा मुश्किल नहीं क्योंकि पांच किलो से कम वजन के ड्रोन के लिए परमिट नहीं चाहिए.

लेकिन उड़ान के साथ जोखिम तो जुड़ा ही होता है. श्टेफान ने साल भर पहले अपना एक रिपेयरिंग सेंटर भी खोल लिया है, "अच्छे दिन भी होते हैं और बुरे दिन भी. कभी कभी हर फ्लाइट के बाद आपको पुर्जे बदलने की जरूरत पड़ती है, क्योंकि हो सकता है कि आपके ड्रोन की कहीं टक्कर हो जा रही हो. लेकिन कई बार हफ्तों कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती."

ड्रोन मार्केट

चीन की कंपनी डीजी के ड्रोन कई हजार यूरो में मिलते हैं. उनकी पिक्चर क्वालिटी जबरदस्त होती है. यहां तक कि शौकिया ड्रोनबाजों के शॉट भी शानदार दिखते हैं, बस उन्हें थोड़ी मेहनत करनी होती है और थोड़ा वक्त लगाना होता है. कूपरकॉप्टर जैसी पेशेवर कंपनियों को परमिट लेना होता है और एक टेस्ट पास करना होता है. बड़े ड्रोनों को कंट्रोल करना थोड़ा जटिल काम होता है लेकिन छोटी मशीनों के मुक़ाबले वे बेहतर रिजल्ट देते हैं. ड्रोन कैसे भी हों, इस्तेमाल करने वाले कोई भी हों. तकनीक जबरदस्त है.

उड़ान में दिलचस्पी रखने वालों को इन मशीनों से संतुष्टि का अहसास भी होता है. रानिल बायर के मुताबिक, "दूसरे लोगों की तरह मुझे भी ऊपर से लिए गए शॉट अच्छे लगते हैं. मैं समझता हूं कि उड़ने वाला उपकरण बना कर बहुत अच्छा महसूस होता है. हर बार, हां, हर बार, जब यह उड़ता है तो मुझे अच्छा लगता है."

उड़ान और सपने एक दूसरे से कैसे घुले मिले हैं. हर किसी का सपना उड़ान भरने का होता है. ड्रोन की मदद से कम से कम तस्वीरों ने तो उड़ना सीख ही लिया.

रिपोर्ट: यूलिया हिट्स/एजेए

संपादन: ओंकार सिंह जनौटी