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दुनिया

पत्रकारों के लिए खतरा है पाकिस्तान

पाकिस्तान पत्रकारों के लिए दुनिया में सबसे खतरनाक देशों में शामिल है लेकिन भारत की भी स्थिति अच्छी नहीं है. वह पिछले साल के मुकाबले 9 स्थान नीचे गिर गया है. अमेरिका भी रैंकिंग में काफी नीचे गिर गया है.

रिपोर्टर्स विदाउट बोर्डर्स ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है कि मीडिया कर्मियों के लिए पाकिस्तान का बलूचिस्तान सबसे खतरनाक जगह है. 2013 में वहां सात पत्रकार मारे गए. पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने 11 पत्रकारों के मरने की बात कही है.पत्रकार संस्था ने पत्रकारों के खिलाफ हिंसा की जांच करने और हत्यारों पर मुकदमा चलाने में कोताही के लिए सरकार की आलोचना की है. 180 देशों वाली रिपोर्ट में पाकिस्तान 158वें स्थान पर है.

भारत में प्रेस को लोकतंत्र का चौथा खंबा कहा जाता है और प्रेस की आजादी के दावे किए जाते हैं. लेकिन प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में भारत की स्थिति भी बेहद खराब है और वह 140वें नंबर पर है. रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगातार दूसरे साल पत्रकारों के खिलाफ हिंसा में तेजी आई है और इंटरनेट के खिलाफ सेंसरशिप बढ़ रही है. पिछले साल वह 131वें नंबर पर था.

ताजा रिपोर्ट में अमेरिका 13 स्थान नीचे गिर कर अल सल्वाडोर और रोमानिया से नीचे चला गया है. वह 46वें स्थान पर है. पेरिस स्थित रिपोर्टर्स विदाउट बोर्डर्स अपनी सालाना रिपोर्ट 2002 से जारी कर रहा है. संगठन का कहना है कि अमेरिका के तालिका में इतने नीचे गिरने की वजह व्हिस्लब्लोअरों और लीक के स्रोतों के खिलाफ उसकी कार्रवाई है. पिछले साल सीआईए के पूर्व एजेंट एडवर्ड स्नोडेन ने अमेरिका के कई रहस्यों का पर्दाफाश किया था. वह फिलहाल रूस में शरण में रह रहे हैं.

इस रिपोर्ट के साथ जारी समिति की टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स की रिपोर्ट में भी सरकारी निगरानी की आलोचना की गई है और उसे प्रेस की आजादी के लिए बड़ा खतरा बताया गया है क्योंकि वह पत्रकारों की निजता और उसके स्रोतों को गोपनीयता की इजाजत नहीं देता. प्रेस फ्रीडम इंडेक्स का कहना है कि व्हिस्लब्लोअरों को दुश्मन बना दिया गया है.

वाशिंगटन मे रिपोर्ट पेश करते हुए न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार जेम्स रीगेन ने कहा, "2013 अमेरिकी इतिहास में प्रेस की आजादी के लिए सबसे खराब साल रहा." रीगेन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक सीआईए अफसर द्वारा लीक सूचना से संबंधित मुकदमा चल रहा है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ओबामा की सरकार आधुनिक इतिहास में सबसे आक्रामक प्रेस विरोधी प्रशासन है.

लगातार चौथे साल फिनलैंड सूची में पहले स्थान पर है जबकि नीदरलैंड्स और नॉर्वे दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं. जर्मनी 14वें स्थान पर है और भारत 140 वें स्थान पर. 180 देशों की सूची में सबसे नीचे तुर्कमेनिस्तान, उत्तर कोरिया और एरिट्रिया है. रिपोर्ट के अनुसार इन तीन देशों में सूचना की आजादी का कोई अस्तित्व नहीं है.

एमजे/एजेए (डीपीए)

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