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दुनिया

पत्थर मारकर मौत न दे ईरान: जर्मनी

जर्मन सरकार ने ईरान से मांग की है कि वह सकीने मोहम्मदी अश्तियानी को पत्थर मार कर मौत देने की सजा पर अमल न करे. ईरान ने उसे रिहाकर ब्राजील जाने देने से इंकार कर दिया है.

जर्मन विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने मौत की सजा पर टिप्पणी करते हुए कहा है, "जर्मन सरकार विश्व भर में मौत की सजा को समाप्त किए जाने का समर्थन करती है. पत्थर मार कर मारना मृत्युदंड का अत्यंत अमानवीय और मानवविरोधी तरीका है जिसकी हर तरह कड़ी निंदा करते हैं." प्रवक्ता ने कहा, "सकीने मोहम्मदी अश्तियानी के मामले में सजा पर अमल को न सिर्फ रोका जाना चाहिए बल्कि रद्द किया जाना चाहिए."

43 वर्षीया सकीने मोहम्मदी अश्तियानी को व्यभिचार के आरोप में मौत की सजा दिए जाने की विश्व भर में आलोचना हुई है. ईरान के सरकारी टेलीविजन पर मोहम्मदी अश्तियानी के रूप में पेश एक महिला ने स्वीकार किया कि उसके प्रेमी ने उसे अपने पति को मारने का सुझाव दिया था. बाद में वह हत्या के समय मौजूद थी. अजेरी भाषा में बोल रही महिला को पहचाना नहीं जा रहा था. उसने काला नकाब पहना था, जिससे सिर्फ उसका नाक और एक आंख दिख रही थी.

मोहम्मदी अश्तियानी के एक वकील ने आरोप लगाया है कि उसे सरकारी टेलिविजन पर पति की हत्या में साथ देने का आरोप मानने के लिए दो दिनों तक यातना दी गई. वकील हूतान कियान ने ब्रिटिश दैनिक गार्डियन से कहा है, "उसे तब तक बुरी तरह पीटा गया और यातना दी गई जबतक उसने कैमरे के सामने आना मान नहीं लिया. इस प्रोग्राम को देखकर उसके 22 साल के बेटे और 19 साल की बेटी को गहरा सदमा लगा है."

गार्डियन ने यह नहीं बताया है कि वकील कहां से बोल रहा था. मोहम्मदी अश्तियानी का एक दूसरा वकील मोहम्मद मोस्तफी ईरानी अधिकारियों द्वारा वारंट जारी किए जाने और पत्नी को गिरफ्तार किए के बाद इस महीने नॉर्वे भाग गया था.

इस बीच ईरान ने कहा है कि वह सकीने मोहम्मदी अश्तियानी को ब्राजील जाने की अनुमति नहीं देगा. ब्राजील में ईरान के राजदूत मोशेन शाटरसादेह ने समाचार एजेंसी एजेंसिया ब्राजील से कहा है कि ईरान को ब्राजील की ओर से कोई औपचारिक पत्र नहीं मिला है. राजदूत ने कहा कि ईरान सरकार को विश्वास है कि राष्ट्रपति लूला ईरान के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते. "वे मानवीय कारणों से प्रेरित हो रहे हैं." ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने जुलाई के अंत में मोहम्मदी अश्तियानी को शरण देने की पेशकश की थी.

रिपोर्ट: एजेंसियां/महेश झा

संपादन: ओ सिंह

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