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दुनिया

पढ़ना चाहता है 14 साल का माओवादी

झारखंड की घाटशिला कोर्ट में हफ्ताभर पहले आत्मसमर्पण करने पहुंचे कुछ माओवादियों के साथ एक बच्चा भी था. लोग समझने की कोशिश ही कर रहे थे कि बच्चा वहां कर क्या रहा था. फिर पता चला कि वह भी आत्मसमर्पण करने आया है.

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14 साल का बारुन मुंडा दो कत्ल और रेल की पटरियों को उड़ाने के आरोप में जेल में है. आत्मसमर्पण के एक हफ्ते बाद बारुन ने पुलिस से अपनी पढ़ाई का इंतजाम करने का अनुरोध किया है. उसका कहना है कि उसे माओवादियों ने जाल में फंसा लिया था और अब वह पढ़ना चाहता है.

सातवीं क्लास तक पढ़े बारुन ने जमशेदपुर के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) रंजीत प्रसाद से कहा है कि उसका आगे पढ़ने का बहुत मन है. हालांकि पुलिस ने उस पर दो लोगों की हत्या में शामिल होने का मुकदमा दर्ज कर लिया है. उस पर दालभूमगढ़ में रेल की पटरी पर धमाका करने का भी आरोप है. वह इन सब मुकदमों को झेलने के लिए तैयार होकर ही आत्मसमर्पण कर चुका है.

एसपी प्रसाद ने बताया कि बारुन को पुलिस ने तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया था और अब उसे वापस जेल भेज दिया गया है. उन्होंने कहा कि जमुआ गांव का रहने वाला बारुन कट्टर माओवादी नेता फोगरा मुंडा का भतीजा है. उसे जबर्दस्ती दल में शामिल कर लिया गया. वह साल भर दल में रहा. उससे हथियार ले जाने और खाना बनाने जैसे काम लिए जाते रहे.

पुलिस का कहना है कि बच्चे को पढ़ाई के लिए पैसे देने के लालच में माओवादियों ने अपने साथ मिलाया. हालांकि जब उसे पैसे नहीं दिए गए तो उसने वहां से भागने का मन बना लिया.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए कुमार

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