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दुनिया

पटरी पर नहीं भारत की कानून व्यवस्था

एशियाई देश कानून और न्याय व्यवस्था की दिक्कतों से जूझने वाले देशों में सबसे आगे पाए गए हैं. वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार भारत में भ्रष्टाचार की भरमार तो है ही, सरकार की जवाबदेही भी नहीं पाई गई.

जर्मनी में कानून व्यवस्था विश्व के पहले 10 देशों में शामिल पाई गई. कानून और न्याय व्यवस्था के कमजोर होने का सीधा संबंध उस समाज के लोगों के शिक्षा, चिकित्सकीय मदद और उन्नति से जुड़े दूसरे अधिकारों को हासिल न कर पाने से हैं. वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट के संस्थापक और सीईओ विलियम एच न्यूकॉम ने डीडब्ल्यू से कहा “ समाज में समान अवसर और न्याय के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है वहां कानून और न्याय का सही व्यवस्था होना.“

इस रिपोर्ट में सबसे अहम बात यह है कि यह लागू नियमों और कायदों के आधार पर नहीं बल्कि उन लोगों को ध्यान में रख कर बनाई गई है जिन पर इनका सीधा असर पड़ता है. कोलंबिया के एक वकील हुआन बोटेरो ने डीडब्ल्यू को बताया कि यह रिपोर्ट 97 हजार आम लोगों से बातचीत के आधार पर बनाई गई है. इस बात को और समझाते हुए बोटेरो ने कहा, "यह जानकारी तो सरकार से हासिल की जा सकती है कि नियम और कायदों की रक्षा के लिए कितने पुलिसकर्मी तैनात हैं. लेकिन यह जानने के लिए कि वाकई उस समाज के लोग कितने सुरक्षित महसूस करते हैं, आपको वहां के लोगों से सीधे ही बात करनी पड़ेगी."

कानून और न्याय व्यवस्था के आयाम

इस रिपोर्ट में शामिल लोगों से कानून व्यवस्था से जुड़े नौ अलग अलग पहलुओं पर चर्चा की गई जिसमें भ्रष्टाचार, सुरक्षा और मूल अधिकारों से लेकर न्याय व्यवस्था को लेकर सवाल शामिल थे. इस जांच से यह भी सामने आया कि जहां चीन एक तरफ भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में आगे है तो दूसरी तरफ सरकारी मामलों में ईमानदारी और पारदर्शिता में बहुत पीछे.

समृद्धि से सीधा संबन्ध

इस रिपोर्ट के अनुसार किसी समाज की कानून व्यवस्था का सीधा संबंध वहां की समृद्धि से है. हालांकि शोधकर्ता कहते हैं कि ऐसा क्यों है यह समझाना मुश्किल है. समृद्धि और कानूनी व्यवस्था के क्षेत्र में आगे देशों में अधिकतर पश्चिमी देश शामिल हैं. इस सूची में जर्मनी पहले 10 ऐसे देशों में है. इस रिपोर्ट ने ज्यादा अहमियत इस बात को दी है कि उस समाज में वकीलों से काम लेने की कीमत और न्यायालय तक पहुंच कितनी आसान या मुश्किल है और इस संदर्भ में कानूनी प्रक्रिया कितनी असरदार है.

एशियाई देशों में सबसे ज्यादा मतभेद

कानून व्यनस्था से जुड़ी इस रिपोर्ट में पाया गया है कि एशिया के विभिन्न इलाकों में कानून और न्याय व्यवस्था में सबसे ज्यादा अन्तर है. इस आधार पर एशिया को तीन समूहों में बांटा गया हैः जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश कानून व्यवस्था की सूची में सबसे आगे रहे जबकि चीन, वियतनाम और मलेशिया जैसे देशों में सामाजिक प्रबन्ध तो अच्छा दिखा मगर मूल अधिकारों की रक्षा के क्षेत्र में ये देश पीछे माने गये. तीसरा समूह उन एशियाई देशों का है जिनमें भारत, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश शामिल हैं. कानून और न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में ये देश दुनिया में सबसे पीछे पाए गए. इन देशों में न्यायालयों में सुस्ती और अल्प संख्यकों के साथ नाइंसाफी के मामले भी अधिक पाए गए.

रिपोर्ट: रोडियॉन एबिगहाउसन/ एसएफ

संपादन: मानसी गोपालकृष्णन

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