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दुनिया

पक्षियों पर भी कच्चे तेल का कहर

मैक्सिको की खाड़ी से अमेरिकी तटीय इलाकों की तरफ़ बहते कच्चे तेल से समुद्री जीवों को जो ख़तरा है वो तो है ही लेकिन पक्षियों को भी ख़तरा पैदा हो गया है.

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पैलिकन

मैक्सिको की खाड़ी से बहते तेल के अमेरिका के लुइसियाना प्रांत के समुद्री तटों पर पहुंचने का ख़तरा है. इन तटीय इलाकों में कई राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क) हैं. जहां गर्मी के मौसम में कई पक्षी अपना घोंसला बनाते हैं और अंडे देते हैं. लुइसियाना प्रांत का प्रमुख पक्षी पैलिकन इन तटीय इलाकों में इसी मौसम में आते हैं और घोसला बनाते हैं.

फिलहाल यहां करीब तीन हज़ार भूरे पैलिकन्स का बसेरा है. अमेरिका के पक्षी विशेषज्ञ माइकल फ्रै ने बताया, "अभी घोसला बनाने, अंडे देने और बच्चों को पालने का मौसम है.मुझे लगता है कि पैलिकन्स पर इस तेल का बहुत असर होगा. मैक्सिको की खाड़ी के आस पास चार तटीय इलाकों में कई राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव अभयारण्य हैं जहां कई इलाकों से आप्रवासी पक्षी आते हैं.

BdT Pelikan lebt mit Störchen

लुइसियाना और मिसीसिपी में वन्य अधिकारियों की एक टीम पक्षियों पर नज़र रखने का काम कर रही है."

ठंड से मौत

अगर पक्षियों के पंखों पर तेल जम जाता है तो वह पक्षियों के पंखों को चिपका देता है जिस कारण उनकी त्वचा को हवा लगने लगती है. पंख पक्षियों के प्राकृतिक कवच की तरह काम करते हैं और उन्हें ठंड से बचाते हैं. अगर ये पंख चिपक जाएं तो भरी गर्मी में भी ठंड के कारण पक्षी हवा लगने से मर सकते हैं.

पक्षियों को बचाने के लिए काम कर रही एरिका मिलर का कहना है कि तेल में सने पक्षी का इलाज करना मुश्किल काम है क्योंकि पहले आपको उस पक्षी को पकड़ना होता और फिर उसे बहुत ध्यान से धोना होता है ताकि उसके पंखों को हानि नहीं पहुंचे.

तटीय पक्षी जैसे पैलिकन, एग्रेट्स, हैरोन तेल के प्रति बहुत संवेदनशील हैं क्योंकि एक बार तेल अगर इनके इलाकों में घुस गया तो ये तेल वहां सालों तक बना रहेगा.

सफ़ाई भी ख़तरनाक

समुद्र में फैले हज़ारों लीटर तेल की सफाई के लिए एक कैमिकल इस्तेमाल किया जा रहा है जो बर्तन धोने वाले साबुन की तरह काम करता है. वन्य जीवन पर नज़र रखने वाली एजेंसियों का कहना है कि इस केमिकल के उपयोग से इतना ज़हरीला मिश्रण तैयार हो जाएगा कि उससे और ज़्यादा ख़तरा होगा.

नैल्को कंपनी तेल साफ़ करने वाला यह केमिकल बना रही है. कंपनी के मुख्य तकनीकी अधिकारी मणि रमेश का कहना है कि ये केमिकल सुरक्षित है.

डिस्पर्सैंट कहे जाने वाला ये केमिकल तेल के अणु को बिलकुल छोटे छोटे हिस्सों में तोड़ देता है जिससे वे पानी में घुल जाते हैं और फिर बैक्टेरिया इसे खा लेते हैं. रमेश का कहना है कि सतह पर बिखरा तेल बैक्टेरिया नहीं खा पाते.

जबकि वरिष्ठ वैज्ञानिक जैकी सैवित्स का मानना है कि ये उतना सुरक्षित नहीं जितना दिखाई देता है. वे कहते हैं कि इस तरह के रसायन ख़ुद ही ज़हरीले हैं. अब तय ये करना है कि आप तटीय पक्षीयों और जीवों को बचाना चाहते हैं या समुद्री जीवों. दोनों में ही नुकसान है.

बीपी का दावा

समुद्र में इस तेल के रिसाव के लिए जिम्मेदार कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम के मुख्य ऑपरेटिंग ऑफिसर डो सटल्स ने मंगलवार को कहा कि ताज़ा जानकारी के हिसाब से अगले तीन दिनों तक तेल तटों तक नहीं पहुंचेगा. सटल्स ने अलाबामा अधिकारियों को ताज़ा जानकारी देते हुए यह बात कही. उन्होंने कहा कि अधिकारी लुइसियाना के द्वीप पर तेल नहीं पहुंचने देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. मंगलवार सुबह ये रिपोर्ट थी कि वहां तेल पहुंच सकता है. सटल्स ने बताया कि उन्होंने 22 जहाज़ इन इलाकों में भेजे हैं.

अलाबामा के गवर्नर बॉब रिले का कहना है कि अगर हमें तीन चार दिन और मिल जाते हैं इस मुश्किल से लड़ने के लिए तो हम काफी बेहतर हालत में होंगे. तेज़ हवाओं के कारण तेल तेज़ी से समुद्र में फैल रहा है और इसे रोकने के काम में मुश्किलें आ रही हैं.

रिपोर्ट: एजेंसियां/आभा मोंढे

संपादन: एस गौड़

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