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दुनिया

पकड़ा गया जमाइका का माफिया किंग डुडुस कोक

चंबल की घाटी में ऐसा अकसर देखा गया है. कानून उन्हें डकैत कहता है, लेकिन इलाके में उन्हें मसीहे की तरह समझा जाता है. कुछ ऐसा ही एक शख़्स है जमाइका का क्रिस्टोफ़र डुडुस कोक, जिसे अब गिरफ़्तार कर लिया गया है.

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क्रिस्टोफ़र डुडुस कोक

स्थानीय पादरी रेवरेंड अर्लमोंट विलियम्स कहते हैं कि लोग उसे रॉबिन हुड की तरह देखते हैं. ऐसा एक शख़्स, जो उनकी ख़ातिर लड़ने-मरने को तैयार है, भले ही वह एक शैतान मसीहा हो. विलियम्स इसकी व्याख्या करते हुए कहते हैं कि जमाइका के लोग धार्मिक होने के साथ-साथ काफ़ी रचनात्मक ढंग से सोचते हैं, और अलग-अलग ढंग से सोचते हैं.

अपने ढंग से क्रिस्टोफ़र डुडुस कोक भी काफ़ी रचनात्मक रहा है. काफ़ी लंबा-चौड़ा धंधा है उसका, राजनीति में उसकी दांव पेंच चलती रही है, और वह शावर पोस्से गिरोह का सरगना है. यह गिरोह शावर, यानी पानी की बौछार से अपने माहौल को साफ़ नहीं करता है, वह गोलियों की बौछार से अपने दुश्मनों को मारने की वजह से मशहूर है.

और कोक का असली धंधा है कोकीन और दूसरे मादक द्रव्यों का.

कोलंबिया, मेक्सिको और पनामा के ड्रग स्मगलर अमेरिका के पश्चिमी तट पर व्यापार के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन क्रिस्टोफ़र डुडुस कोक का इलाका है अमेरिका का पूर्वी तट. न्यूयार्क में ज़्यादातर कोकीन की सप्लाई वही करता है, अमेरिकी जांचकर्ताओं का कहना है.

जमाइका की राजधानी किंग्सटन के टिवोली गार्डन इलाके में उसका एकछत्र राज है और यहां के सांसद हैं

Jamaika Kingston

डुडुस कोक के समर्थन में झुग्गिवासियों का प्रदर्शन

प्रधान मंत्री ब्रूस गोल्डिंग. कोक खुद सत्तारूढ़ जमाइका लेबर पार्टी का समर्थन करता है. इसलिए मादक द्रव्यों की तस्करी और पिछले सालों के दौरान कई लोगों की मौत के लिए ज़िम्मेदार शावर पोस्से का सरगना होने के बावजूद कोई उसका बाल भी बांका नहीं कर सका.

लेकिन मामला काफ़ी आगे बढ़ गया था. अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा था. काफ़ी आनाकानी के बाद गोल्डिंग को कोक की गिरफ़्तारी की मुहिम छेड़नी पड़ी. इस कोशिश में कम से कम 73 लोगों की जान गई.

क्रिस्टोफ़र कोक के पिता जिम ब्राउन भी ऐसे ही करामाती थे. आज भी टिवोली गार्डन की झुग्गी बस्तियों में दीवारों पर ब्राउन की विशाल तस्वीरें देखी जा सकती हैं. 1992 में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था. उसके बाद हिरासत में लगी रहस्यमय आग में उनकी जान चली गई. लोगों का कहना है कि उनके पास बड़े लोगों के बारे में काफ़ी कुछ जानकारी थी.

कहीं क्रिस्टोफ़र डुडुस कोक के पास भी ज़रूरत से ज़्यादा जानकारी न हो !

रिपोर्टः एजेंसियां/उभ

संपादनः ए जमाल

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