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दुनिया

पकड़ा गया गुड़िया सी शक्ल वाला डॉन

वह हैंडसम है. नीली आंखों वाला, गोरा चिट्टा. मेक्सिको में इसे बार्बी कहते हैं. गुड़िया. लेकिन वह गुड्डे गुड़ियों वाला काम नहीं करता, खून बहाता है. ड्रग्स बेचता है. उसके सिर पर 10 करोड़ का इनाम था. मुश्किल से पकड़ में आया.

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मेक्सिको में एडगर वाल्देज किसी दहशत से कम नहीं. निवेशकों और पर्यटकों तक में उसका खौफ फैला है. लेकिन साल भर की मेहनत के बाद उसे पकड़ लिया गया है. मेक्सिको सरकार का कहना है कि मेक्सिको सिटी के रिहाइशी इलाके में 37 साल के वाल्देज को काबू कर लिया गया है और उसने पकड़े जाने से पहले ज्यादा प्रतिरोध नहीं किया.

मेक्सिको की सुरक्षा मामलों के प्रवक्ता अलेखांद्रो पोएरे ने बताया, "वाल्देज का संगठित अपराधिक ग्रुपों के साथ संपर्क है. वह केंद्रीय और दक्षिणी अमेरिका से अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी करता है. उसकी अमेरिका में भी तलाश है." अभी यह तय नहीं है कि उसे अमेरिका भेजा जाएगा या नहीं.

अमेरिकी प्रांत टेक्सास में पैदा हुए वाल्देज को लोग उसके गोरे रंग की वजह से "ला बार्बी" नाम से भी जानते थे. समझा जाता है कि उसने मध्य मेक्सिको में नशीली दवाओं की सत्ता हथियाने के लिए गैंगवार को भी अंजाम दिया, जिसमें काफी खून खराबा हुआ. उस पर 20 लाख डॉलर का इनाम भी रखा जा चुका है. सूत्रों ने बताया कि लगभग एक साल तक उस पर नजर रखे जाने के बाद सोमवार को उसे काबू में किया जा सका. पिछले दिनों मेक्सिको में एक और ड्रग माफिया इगनासियो नाचो कोरोनल की हत्या हुई है और उसमें भी वाल्देज का हाथ बताया जा रहा है.

मेक्सिको की सुरक्षा मामलों के जानकार मानते हैं कि वाल्देज की गिरफ्तारी से सरकार को फौरी तौर पर तो राहत जरूर मिलेगी, लेकिन बड़ी कामयाबी तब होगी, जब पुलिस उसके शूटरों और बिचौलियों को गिरफ्तार कर सके. तभी उसका गैंग खत्म हो सकेगा.

मेक्सिको नशीली दवाइयों के लिए बदनाम है. नए राष्ट्रपति फेलिपे काल्डेरॉन ने इस पर नकेल कसने के लिए मुहिम चलाई है और पिछले साढ़े तीन साल में जारी संघर्ष के दौरान 28,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. राष्ट्रपति काल्डेरॉन को अमेरिका का समर्थन हासिल है.

मेक्सिको में ड्रग माफिया का वही हाल है जो किसी जमाने में मुंबई में अंडरवर्ल्ड का हुआ करता था. अनुमान है कि हर साल नशीली दवाओं के कारोबार में 40 अरब डॉलर का लेन देन होता है और इस विशाल कारोबार पर कब्जा जताने के लिए सभी हथकंडे अपनाए जाते हैं. एक दूसरे गुटों के लोगों की हत्या तो आम बात है, उन्हें तड़पाना, बंधक बनाना और फिरौती वसूलना भी होता रहता है. मेक्सिको के अंदर ड्रग माफिया के बीच शूटिंग होती रहती है.

उनके कारोबार का फलना फूलना इस बात की भी निशानी है कि कहीं न कहीं सरकारी तंत्र से उनकी मिलीभगत है. इस पर काबू पाने के लिए राष्ट्रपति ने हाल ही में 10 फीसदी पुलिस बल को बर्खास्त कर दिया. लेकिन इसका कोई खास फायदा नहीं हुआ. सोमवार को पुलिस और माफिया के बीच 12 घंटे तक गोलीबारी चलती रही और आखिर में आठ लोगों की जान लेकर ही रुकी. हाल के कुछ दिनों में अमेरिकी सीमा पर गोलीबारी में 72 लोगों की मौत हो चुकी है.

मेक्सिको में कुख्यात ड्रग तस्कर अर्तुरो बेल्त्रान लेयवा की पिछले साल उसी के साथियों ने हत्या कर दी थी. इसके बाद से टॉप बॉस बनने की लड़ाई चल रही है. बार्बी वाल्देज भी इसी चक्कर में था.

रिपोर्टः रॉयटर्स/ए जमाल

संपादनः वी कुमार

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