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दुनिया

पंजाब में बीयर की बढ़ती खपत

पंजाब के नौजवानों में बीयर पीने का क्रेज बढ़ता नजर आ रहा है. इसी के चलते आबकारी एवं कराधान विभाग को देसी और अंग्रेजी शराब के कोटे के साथ बीयर के कोटे को भी बढ़ाना पड़ रहा है.

राज्य में शराब के दूसरे ब्रांड्स के मुकाबले बीयर की खपत बढ़ी है जिसका सबसे बड़ा कारण नौजवान पीढ़ी में बीयर की लोकप्रियता बढ़ना है. लोगों की शिकायत है कि पंजाब में चल रहे शराब के ठेकों पर पिछले साल की बीयर बेची जा रही है. साथ ही बीयर के कुछ ब्रांड्स की कीमत निर्धारित न होने के कारण ठेकेदार मनमाने दामों पर बीयर बेच रहे हैं.

पंजाब में ड्रग की समस्या इतनी विकराल होती जा रही है कि हाल के संसदीय चुनाव के प्रचार के दौरान भी यह मुद्दा रहा है. जिन लोगों के पास ड्रग के लिए पैसा नहीं वे शराब पी रहे हैं और जिनके पास उसके लिए भी धन नहीं वे सिरप वाली दवा का ही इस्तेमाल नशे के लिए कर रहे हैं. पिछले साल जारी किए गए एक सरकारी आंकड़े के अनुसार प्रांत दो तिहाई घरों में कम से कम एक व्यक्ति को नशे की लत है.

इसके बावजूद पंजाब में शराब का उत्पादन बढ़ रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में देसी शराब का उत्पादन 1993 में 17,657 लीटर था जो 2010 के चालू वर्ष तक बढ़कर 29,445 लीटर हो गया. इन सालों में शराब के उत्पादन में 66 से 77 प्रतिशत वृद्धि हुई. जबकि इसके विपरीत बच्चों के खाने के लिए बनने वाले पदार्थों में सिर्फ 60 प्रतिशत ही वृद्धि हुई.

बीयर के उत्पादन ने भी नए रिकॉर्ड कायम कर दिए हैं. इसके उत्पादन में 17 सालों में 209 प्रतिशत की भारी वृद्धि रिकार्ड की गई है. 1993-94 में इसका उत्पादन 15,365 लीटर था जो 2009-10 में बढ़कर 47,496 लीटर तक पहुंच गया. यह 2005-6 में 29 हजार लीटर, 2006-7 में 34,292 लीटर, 2007-8 में 36,502 लीटर और 2008-9 में 41,638 लीटर रहा.

इसके मुकाबले इस पंजाब में अधिकृत आंकड़ों के अनुसार दूध के उत्पादन में सिर्फ 185 लीटर की वृद्धि ही हुई है. पशुओं की फीड में सिर्फ 42.17 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई. पंजाब में अंग्रेजी शराब का उत्पादन भी लगातार बढ़ रहा है. सत्रह सालों में इसके उत्पादन में 21,435 लीटर यानि 131 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

आईबी/एमजे (वार्ता)

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