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विज्ञान

न्यूरो साइंस के नाम चिकित्सा का नोबेल

इंसानी दिमाग के आंतरिक 'जीपीएस' सिस्टम का पता लगाने वाले वैज्ञानिकों को इस बार चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार मिला है.

2014 के नोबेल पुरस्कारों का एलान स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट ने किया. चिकित्सा क्षेत्र का पुरस्कार इस बार मस्तिष्क पर शोध कर रहे तीन वैज्ञानिकों को मिला. मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार पाने वाले तीन वैज्ञानिकों में दो पति-पत्नी हैं.

न्यूरो साइंस के वैज्ञानिक जॉन ओकीफ, माय-ब्रिट मोसर और एडवर्ड मोसर को मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार देने का एलान किया गया. न्यूरोसाइंटिस्ट जॉन ओकीफ यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में प्रोफेसर हैं जबकि मोसर दंपत्ति नॉर्वे के हैं. तीनों वैज्ञानिकों ने बीते एक दशक में मतिष्क के जटिल रहस्य सुलझाए हैं. माय-ब्रिट मोसर और एडवर्ड मोसर नॉर्वे की विज्ञान और तकनीकी यूनिवर्सिटी में काल्वी इंस्टीट्यूट फॉर सिस्टम्स न्यूरोसाइंस एंड सेंटर फॉर बायोलॉजी ऑफ मेमोरी की स्थापना कर चुके हैं.

दिमाग का जीपीएस

इन तीनों के नाम का एलान करते हुए कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट ने कहा, "पोजिशनिंग सिस्टम की खोज, यानी दिमाग का ऐसा जीपीएस जिसकी मदद से हम हर जगह अपनी अपनी दिशा तय करते हैं. जॉन ओकीफ, माय-ब्रिट मोसर और एडवर्ड मोसर ने ऐसी परेशानी का हल खोज निकाला, जिसने वैज्ञानिकों और दर्शनशास्त्रियों को सदियों से उलझाया हुआ था. कैसे मतिष्क आस पास के माहौल के मुताबिक नक्शा तैयार करता है और जटिल परिस्थितियों में भी हम कैसे अपना रास्ता चुनते हैं."

आने वाले दिनों में भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में जबरदस्त काम करने वाली शख्सियतों को भी सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. पुरस्कार वितरण समारोह 10 दिसंबर को होगा. नोबेल पुरस्कार स्वीडन के मशहूर वैज्ञानिक और उद्योगपति अल्फ्रेड नोबेल की याद में दिए जाते हैं. अल्फ्रेड नोबेल के नाम 350 अलग अलग पेटेंट थे, जिनमें से सबसे मशहूर डायनामाइट है.

कैसे हुई शुरुआत

1888 में फ्रांस के कान शहर में अल्फ्रेड नोबेल के भाई लुडविग की मौत हो गई. एक फ्रेंच अखबार ने गलती से अल्फ्रेड नोबेल की मौत की खबर छाप दी. खबर की हेडलाइन थी, "मौत के कारोबारी की मौत." अखबार ने उन्हें मौत की विरासत छोड़ने वाला बताया, "डॉ. अल्फ्रेड नोबेल, जिन्होंने लोगों को पहले की तुलना में बहुत ही ज्यादा जल्दी मारने का रास्ता खोजा, कल मर गए."

इस खबर ने अल्फ्रेड नोबेल को विचलित कर दिया. वह नहीं चाहते थे कि लोग उन्हें "मौत के कारोबारी" के रूप में याद रखें. लंबे सोच विचार के बाद नवंबर 1895 में पेरिस के एक क्लब में नोबेल ने अपनी आखिरी वसीयत पर दस्तखत किए. वसीयत में तय किया गया कि उनकी संपत्ति के 94 फीसदी हिस्से से नोबेल पुरस्कार शुरू किया जाएगा. पुरस्कार हर साल दिए जाएंगे और इनके चयन में नागरिकता कोई मुद्दा नहीं होगी.

साल भर बाद 10 दिसंबर 1896 को अल्फ्रेड नोबेल ने आखिरी सांस ली. तब से नोबेल पुरस्कारों जीतने वालों को 10 दिसंबर को पुरस्कार राशि और सम्मान पत्र सौंपा जाता है. पहली बार नोबेल पुरस्कार 10 दिसंबर 1901 को दिए गए.

ओएसजे/एमजे (डीपीए)

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