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दुनिया

नोबेल समारोहः कौन आएगा, कौन नहीं

चीन समेत दुनिया के 20 देश नोबेल शांति पुरस्कार समारोह में हिस्सा नहीं ले रहे हैं. चीन सरकार के विरोधी लिऊ शियाओबो को मिलने वाले इस पुरस्कार के समारोह से उन देशों ने किनारा किया है जिनके चीन से नजदीकी रिश्ते हैं.

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ओस्लो में शुक्रवार को होने वाले समारोह में जो देश नदारद रहेंगे उनमें अफगानिस्तान, अल्जीरिया, चीन, कोलंबिया, क्यूबा, मिस्र, इराक, ईरान, कजाखस्तान, मोरक्को, पाकिस्तान, फिलीपींस, रूस, सऊदी अरब, श्रीलंका, सूडान, ट्यूनीशिया, वेनेजुएला और वियतनाम शामिल है. यूक्रेन ने पहले समारोह में शामिल होने से इनकार किया है लेकिन नोबेल संस्थान के निदेशक गीर लुंडेस्टाड ने गुरुवार को कहा कि यूक्रेन ने अपना मन बदल लिया है और वह समारोह में आएगा. सर्बिया ने भी पहले इनकार किया और फिर बाद में अपने प्रतिनिधि को भेजने का फैसला किया.

Norwegen China Friedensnobelpreis 2010 an Liu Xiaobo Flash-Galerie

लुंडस्टाड ने फिलीपींस के भी समारोह में आने की उम्मीद जताई लेकिन बाद में वहां की सरकार ने अपनी मौजूदगी से इनकार किया. अर्जेंटीना के बारे में उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि अर्जेंटीना समारोह में शामिल नहीं होगा. कम से कम वहां के राजदूत तो समारोह में अपने देश का प्रतिनिधित्व नहीं करेंगे." पिछले महीने ही चीन के साथ 8.5 अरब डॉलर का समझौता करने वाले रूस ने अपनी पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं का हवाला देते हुए समारोह से किनारा कर लिया है. वहीं श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देशों के चीन से आर्थिक और रक्षा संबंध हैं जबकि इराक, ईरान और सऊदी अरब उसे तेल की आपूर्ति करते हैं.

ईरान अपने परमाणु कार्यक्रमों को लेकर खुद पर लगने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों से लड़ने के लिए चीन के समर्थन पर निर्भर है. साथ ही, वह इस बात को भी नहीं भूला है कि ईरान सरकार की आलोचक शिरीन इबादी को भी 2003 में इसी नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

ओस्लो में मौजूद 65 देशों के राजदूतों में से ज्यादातर नोबेल पुरस्कार समारोह में शामिल होंगे. इनमें यूरोपीय संघ के देशों के अलावा अमेरिका भी शामिल है. जापान भी इस समारोह में शिरकत करेगा जिसका चीन के साथ सीमा विवाद रहा है. आर्थिक क्षेत्र में चीन को टक्कर देने वाले ब्राजील, भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण कोरिया जैसे इस नोबेल समारोह में शामिल हो रहे हैं. खास कर भारत का समारोह में शामिल होना इसलिए भी अहम है क्योंकि पांच दिन बाद ही चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ भारत की यात्रा पर जा रहे हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः वी कुमार

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