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दुनिया

नोबेल पुरस्कार को जानिए

किसे कब कितने नोबेल पुरस्कार मिले, किसने पुरस्कार लेने से मना कर दिया, किस देश को मिले सबसे ज्यादा नोबेल पुरस्कार, जानिए नोबेल की दुनिया के कुछ रोमांचक तथ्य..

अल्फ्रेड नोबेल की मौत के बाद जब उनका वसीयतनामा खोला गया तो उनके परिवार वाले दंग रह गए. उन्होंने उम्मीद नहीं की थी कि नोबेल अपनी सारी संपत्ति इन पुरस्कारों के नाम कर जाएंगे. पांच साल तक उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया, लेकिन फिर 1901 में नोबेल पुरस्कार की शुरुआत की गयी. पिछले 112 सालों में नोबेल पुरस्कारों की दुनिया में बहुत कुछ हो चुका है..

Porträt von Mahatma Gandhi

महात्मा गांधी को मरणोपरांत नोबेल शांति पुरस्कार देने पर चर्चा तो की गई पर ऐसा कभी हुआ नहीं.

मौत के बाद पुरस्कार

केवल जीवित लोगों को ही नोबेल पुरस्कार दिया जा सकता है. लेकिन तीन व्यक्ति ऐसे हैं जिन्हें मरणोपरांत पुरस्कार दिया गया. सबसे पहले 1931 में एरिक एक्सल कार्लफेल्ट को साहित्य के लिए और फिर तीस साल बाद 1961 में डाग हामरशोल्ड को शांति पुरस्कार दिया गया. इन दोनों की ही मौत नामांकन और पुरस्कार दिए जाने के बीच हुई. 1974 से नियम बदल कर ऐसा होने की संभावना भी मिटा दी गई.

2011 में कनाडा के राल्फ स्टाइनमन को चिकित्सा के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. लेकिन जब उनका नाम चुना गया उस वक्त नोबेल कमिटी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि स्टाइनमन की तीन दिन पहले ही मौत हो चुकी है. इस मामले को नोबेल कमेटी ने अपवाद करार दिया. 1948 में महात्मा गांधी का नाम भी नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना जाना था, लेकिन नामांकन से दो दिन पहले ही उनकी हत्या कर दी गयी. उस समय भी कमेटी ने मरणोपरांत पर चर्चा तो की, लेकिन ऐसा कभी हुआ नहीं. कमेटी ने कई बार इस पर खेद भी जताया.

दो बार सम्मानित

चार ऐसे लोग भी हैं जिन्हें दो बार नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. अमेरिका के जॉन बारडेन को दो बार भौतिकी के लिए पुरस्कार मिला. पहली बार 1956 में ट्रांजिस्टर के आविष्कार के लिए और दूसरी बार 1972 में सुपरकंडक्टिविटी थ्योरी के लिए. केमिस्ट्री में दो बार पुरस्कार मिला ब्रिटेन के फ्रेडेरिक सैंगर को. पहली बार 1958 में इंसुलिन की संरचना को समझने के लिए और दूसरी बार 1980 में. एक शख्स ऐसे भी हैं जिन्हें दो अलग अलग क्षेत्रों में पुरस्कार दिया गया है. अमेरिका के लाइनस पॉलिंग को 1954 में केमिस्ट्री के लिए और फिर 1962 में शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्होंने परमाणु बम के परीक्षण के खिलाफ आवाज उठाई थी.

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महिलाओं की कमी

मैरी क्यूरी एकमात्र महिला हैं जिन्हें दो बार नोबेल पुरस्कार मिला, 1903 में रेडियोएक्टिविटी समझने के लिए फिजिक्स में और 1911 में पोलोनियम और रेडियम की खोज करने के लिए केमिस्ट्री में.

2012 तक कुल 44 महिलाओं को ही नोबेल पुरस्कार दिया गया है. इनमें से 16 विज्ञान के क्षेत्र में हैं, भौतिकी में दो, रसायन शास्त्र में चार और चिकित्सा में दस.

पुरस्कार से इंकार

1964 में फ्रांस के ज्यां पॉल सार्त्र ने पुरस्कार लेने से इंकार कर दिया था. उनका कहना था "एक लेखक को खुद को संस्थान नहीं बनने देना चाहिए." इसके बाद 1973 में विएतनाम के ले डुक थो ने देश के राजनीतिक हालात के चलते पुरस्कार लेने से मना कर दिया था.

इसके अलावा हिटलर के शासन के दौरान वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार स्वीकारने की अनुमति नहीं थी. 1938 में रिचर्ड कून, 1939 में अडोल्फ बूटेनांट और गेरहार्ड डोमाक को नामांकित किया गया था. दूसरे विश्व युद्ध के समाप्त होने के बाद ही उन्हें पुरस्कार दिया जा सका, हालांकि पुरस्कार की राशि उन्हें नहीं दी गयी.

सबसे ज्यादा नोबेल

सबसे ज्यादा नोबेल पुरस्कार मिले हैं अमेरिका के वैज्ञानिकों को. दूसरे स्थान पर है जर्मनी. इसके बाद ब्रिटेन और फ्रांस का नंबर आता है. इसे संयोग ही कहेंगे कि पुरस्कार लेने वाले अधिकतर लोगों का जन्मदिन 21 मई और 28 फरवरी को होता है. कहा जा सकता है कि इस दिन विद्वान जन्म लेते हैं.

रिपोर्ट: ब्रिगिटे ओस्टेराथ/ईशा भाटिया

संपादन: निखिल रंजन