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दुनिया

नोबेल ठुकराने वाले लोग

नोबेल पुरस्कारों का इंतजार पूरे साल रहता है. लेकिन छह लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने नोबेल पुरस्कार को ठुकरा दिया है. दो ने अपने मन से और बाकी के चार ने दबाव में आकर.

फ्रांस के ज्यां-पॉल सात्र ने 1964 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया, जबकि वियतनाम के प्रधानमंत्री ले डुक थो ने 1973 में शांति के नोबेल को ठोकर मार दी. इसके अलावा नाजी तानाशाह अडोल्फ हिटलर ने 1938 में वैज्ञानिक रिचर्ड कून को रसायन का नोबेल लेने से रोक दिया, जबकि 1939 में दोबारा रसायन का नोबेल जीतने वाले अडोल्फ बुटेनांट और मेडिकल साइंस का नोबेल हासिल करने वाले गेरहार्ड डोमाक को भी रोक दिया. सोवियत संघ के अधिकारियों ने साहित्यकार बोरिस पास्तरनाक को 1958 का साहित्य का नोबेल नहीं लेने दिया.

साल 1901 में शुरू हुआ नोबेल पुरस्कारों का सिलसिला 100 साल से ज्यादा से चल रहा है और इस दौरान 834 व्यक्तियों और 21 संस्थाओं को ये पुरस्कार दिए जा चुके हैं. रूसी मूल के 90 साल के अमेरिकी नागरिक लियोनिद हुरविज यह पुरस्कार जीतने वाले सबसे बुजुर्ग लॉरेट हैं, जिन्हें 2007 में 90 साल की उम्र में अर्थशास्त्र का नोबेल मिला. हालांकि इसके कुछ ही दिनों बाद उनकी मौत हो गई.

बहरहाल, सोमवार से नोबेल पुरस्कारों का हफ्ता शुरू हो रहा है, जिसमें सबसे पहले सोमवार को ही मेडिकल साइंस का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा. इसका एलान 11:30 बजे सुबह (भारतीय समय से 3 बजे दोपहर) किया जाएगा. हर साल मेडिकल साइंस, भौतिक शास्त्र, रसायन, अर्थशास्त्र और साहित्य के क्षेत्र में नोबेल दिया जाता है, लेकिन इनके अलावा सबसे बड़ा पुरस्कार नोबेल के शांति पुरस्कार को माना जाता है. इस साल 11 अक्तूबर को नोबेल शांति पुरस्कार विजेता की घोषणा की जाएगी.

Marie Curie

दो बार जीती मेरी क्यूरी

साल 2011 तक नोबेल पुरस्कार विजेताओं को एक करोड़ क्रोनर की राशि दी जाती थी, जिसे पिछले साल घटा कर 80 लाख क्रोनर कर दिया गया. नोबेल समिति का कहना है कि भविष्य के पुरस्कारों को भी सुनिश्चित करने के लिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा.

हर साल की तरह इस बार भी नामों को लेकर कयासों और अफवाहों का बाजार गर्म है लेकिन भौतिक शास्त्र के मामले में ब्रह्मांड के अब तक के सबसे छोटे कण हिग्स बोसोन के आविष्कारकों का नाम सबसे आगे चल रहा है. एक महाप्रयोग के दौरान पिछले साल स्विट्जरलैंड में सर्न की प्रयोगशाला में इस कण का पता चला था. ब्रिटेन के वैज्ञानिक पीटर हिग्स और बेल्जियम के फ्रांकोआ एंगलेर्ट ने 1964 में ही इस कण की भविष्यवाणी की थी.

जहां तक सबसे चर्चित नोबेल शांति पुरस्कार की बात है, पाकिस्तान की किशोरी मलाला यूसुफजई का नाम सबसे आगे चल रहा है. हालांकि नोबेल समिति कभी भी इस बात का खुलासा नहीं करती कि किन लोगों का नामांकन हुआ है और पुरस्कार के नाम आखिरी दिन तक गुप्त रहते हैं. लेकिन अगर मलाला को नोबेल पुरस्कार मिलता है, तो वह यह पुरस्कार हासिल करने वाली सबसे कम उम्र की शख्सियत बन जाएगी. अब तक यह सम्मान 25 साल के लॉरेंस ब्रैग के नाम है, जिन्हें 1915 में भौतिक शास्त्र का नोबेल मिला था.

पर महिलाओं के लिए नोबेल पुरस्कार बहुत खुशी लेकर नहीं आया है. 1901 से अब तक 795 पुरुषों को यह पुरस्कार मिला है, जबकि महिलाओं की संख्या सिर्फ 44 रही है. इसमें मैडम क्यूरी को दो बार नोबेल पुरस्कार मिला है.

एजेए/एमजे