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नैटो काफिले पर हमला, 7 की मौत

संदिग्ध तालिबानी बंदूकधारियों ने बुधवार सुबह नैटो के 50 ट्रकों पर हमला किया. इसमें 7 लोग मारे गए हैं. ये हमला इस्लामाबाद से सिर्फ 15 किलोमीटर की दूरी पर हुआ. राजधानी के पास इस तरह का पहला हमला.

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नैटो के ये 50 ट्रक अंतरराष्ट्रीय सेना के लिए रोज़मर्रा का सामान ले कर जा रहे थे. पहले भी तालिबान के लड़ाकों ने अमेरिकी नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय सेना के काफिलों पर हमले किए हैं लेकिन वे उत्तर पश्चिमी प्रांत में या सीमा के आसपास के इलाकों में होते थे.

कम से कम 10 बंदूकधारी मोटरसाइकलों पर और छोटे ट्रकों में सवार हो कर तार्नोल गांव के नज़दीक आए और ड्राइवरों और काम करने वालों को गोली मारी. बाद में ये हमलावर भाग गए और जाते जाते सभी ट्रकों को आग लगा गए. पुलिस अधिकारी ग़ुलाम मुस्तफा ने जानकारी दी, "सात लोग मारे गए हैं और 50 से ज़्यादा ट्रकों को आग लगा दी गई और छह लोग घायल हुए हैं."

ये ट्रक ईंधन, खाना और अन्य वस्तुएं अफगानिस्तान ले जाने वाले थे. सामान्यतया इन ट्रकों में हथियार नहीं ले जाए जाते.

तालिबान के गढ़ माने जाने वाले उत्तर पश्चिमी प्रांतों में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई के जवाब में लड़ाकों ने कई आत्मघाती हमले किए हैं.

सुरक्षा मामलों के जानकार तलत मसूद कहते हैं, "ये बहुत आश्चर्यजनक है कि इस्लामाबाद के इतने नज़दीक आतंकियों का एक गुट आया और हमला किया. ये दिखाता है कि सुरक्षा व्यवस्था में कहीं भारी कमी है."

अमेरिकी सेना अफगानिस्तान के लिए 75 फीसदी सामान पाकिस्तान से होकर जाता है जिसमें 40 फीसदी ईंधन भी भेजा जाता है.

पिछले ही महीने अहमदिया लोगों की मस्जिद पर हमले में तालिबानियों ने 80 लोगों को मार दिया था. लेकिन ताज़ा हमला तुलनात्मक रूप से शांत और कड़ी सुरक्षा वाली राजधानी के बाहर हुआ है और ये सवाल खड़ा कर गया है कि इस तरह के हमलों से इस्लामाबाद कितना सुरक्षित है.

अप्रैल में पंजाब प्रांत में आतंकियों ने 12 नैटो ट्रकों को आग लगाई थी और 4 पुलिसकर्मियों को मार दिया था.

वहीं मंगलवार को ओरकज़ई में 6 सुरक्षाकर्मी मारे गए. सेना का दावा है कि उसने एक हमले में 30 चरमपंथियों को मार गिराया.

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा मोंढे

संपादनः एन रंजन

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