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दुनिया

नेपाल में भूकंप के बाद बचाव कार्य में मुश्किलें

नेपाल में आए भयानक भूकंप में मरने वालों की संख्या शवों को निकाले जाने के साथ लगातार बढ़ रही है. नए झटकों के डर से बहुत लोग सड़कों पर रात गुजार रहे हैं. पड़ोसी भारत में भी भूकंप से तबाही हुई है.

नेपाल में आज आए विनाशकारी भूकंप में मरने वालों की संख्या एक हजार से ज्यादा हो गयी है और हजारों लोग घायल हुए हैं. भूकंप का कहर इसके बाद सबसे अधिक भारत पर बरपा, जहां शनिवार रात तक कम से कम 62 लोगों के मौत की खबर है. तिब्बत में 12 और बंगलादेश में चार लोगों की मौत हो गयी.

पिछले 81 वर्षों में नेपाल में आया यह अब तक का सबसे भीषण भूकंप है. इससे पहले 1934 में आये विनाशकारी भूकंप में नेपाल और बिहार के हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. नेपाल पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि रिष्टर पैमाने पर 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप के कारण काठमांडू घाटी में 970 मारे गए हैं. देश में आये भयानक भूकंप के कारण नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला अपनी इंडोनेशिया यात्रा को बीच में छोड़कर वापस लौट आए.

नेपाल में भारतीय सेना के एक पर्वतारोहण दल को एवरेस्ट से 18 शव बरामद होने की सूचना मिली है. इसी महीने वार्षिक पर्वतारोहण सत्र के शुरु होने के कारण यहां 400 विदेशी समेत 1000 से ज्यादा पर्वतारोही मौजूद थे. सेना के प्रवक्ता ज्ञानेंद्र श्रेष्ठ ने बताया कि भूकंप के कारण माउंट एवरेस्ट पर हिमस्खलन की घटना हुई. हिमस्खलन के कारण एवरेस्ट के आधार शिविर का कुछ हिस्सा बर्फ में दफन हो गया और दो शिविर घायलों से भर गए हैं. विश्व प्रसिद्ध पशुपति नाथ मंदिर को भूकंप से किसी तरह का नुकसान नहीं पहुचां है लेकिन प्राचीन धरहरा मीनार ढह गई.

अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, भूकंप का केंद्र राजधानी काठमांडू से 80 किलोमीटर दूर स्थित लमजुंग को माना जा रहा है. नेपाल से लगे भारत के उत्तरी और पूर्वी राज्यों में भूकंप से कम से कम 62 लोगों की मौत हो गयी और 133 से अधिक घायल हुए हैं. भूकंप के कारण सबसे ज्यादा 45 लोग बिहार में मारे गए हैं. उत्तर प्रदेश में 12 और बंगाल में पांच लोगों की मौत हुई है. राहत और बचाव कार्यों के लिये राष्ट्रीय आपदा कार्य बल की एक टीम गोरखपुर और चार टीमें बिहार भेजी गयी हैं.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल और भारत के कुछ हिस्सों में आए भीषण भूंकप पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि "नेपाल की पीड़ा हमारी पीड़ा है और सवा करोड़ देशवासी मुसीबत की इस घड़ी में उसके साथ है." भारत नेपाल की मदद के लिए राहत, बचाव और चिकित्सा दल भेज रहा है. राष्ट्रीय आपदा कार्य बल की कुछ टीमें नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंची हैं. काठमांडू मं भारतीय दूतावास को भी कुछ नुकसान पहुंचा है. वहां दो भारतीयों के मरने की खबर है.

अंतरराष्ट्रीय राहत संगठन नेपाल की मदद को सामने आए हैं. अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस के जगन चापागाइन ने कहा, "हमें बर्बादी के आयाम का अंदाजा नहीं है, लेकिन यह 1934 के बाद सबसे घातक और विनाशकारी भूंकप हो सकता है." भूकंप में रास्ते टूट गए हैं और संचार बाधित है जिससे विपदाग्रस्त इलाकों में संपर्क मुश्किल हो रहा है. दूसरी राहत संस्थाएं भी मदद की जरूरत का अंदाजा लगाने में मुशिकलों का सामना कर रही है. ऑक्सफैम संस्था की कंट्री डाइरेक्टर सिसिलिया काइजर का कहना है कि टेलिफोन लाइनें कटी हुई हैं और बिजली भी बंद है जिसकी वजह से मोबाइल फोन चार्ज करना संभव नहीं. फ्रांस की राहत संस्था एक्शन एगेंस्ट हंगर ने एक बयान में कहा है कि उनके कार्यकर्ता नुकसान और जरूरत का जायजा लेने के लिए प्रभावित इलाकों के रास्ते में हैं.

अमेरिका एक आपाद रेस्पॉन्स टीम नेपाल भेज रहा है और उसने 10 लाख डॉलर की शुरुआती मदद की घोषणा की है. यूरोपीय संघ ने भी कहा है कि उनके मानवीय सहायता विशेषज्ञ इलाके में जा रहे हैं. संघ ने एक बयान में कहा है, "जान माल के नुकान के पूरे पैमाने का अभी पता नहीं है लेकिन रिपोर्टों के अनुसार जीवन की क्षति, घायल और सांस्कृतिक धरोहरों को बहुत ज्यादा नुकसान होने की आशंका है. जर्मनी, ब्रिटेन और स्पेन ने नेपाल को समर्थन और मदद देने का आश्वासन दिया है. नॉर्वे ने 35 लाख यूरो की सहायता का वचन दिया है.

एमजे (वार्ता, एएफपी)

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