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दुनिया

नेपाल में भारत का ऑपरेशन मैत्री

भारत ने नेपाल में भूकंप प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालने और राहतकार्य के लिए ऑपरेशन मैत्री के तहत अपनी पूरी टीम नेपाल भेजी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना और डॉक्टरों के काम की सराहना की.

नेपाल में भूकंप के कारण मारे गए लोगों की संख्या तीन हजार को पार कर चुकी है. दो दिन में वहां 80 से भी ज्यादा झटके महसूस किए गए हैं. इस बीच दुनिया भर से नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजी जा रही है. रविवार को भारत ने नेपाल में भूकंप पीड़ितों की मदद के लिए ऑपरेशन मैत्री की घोषणा की. ऑपरेशन के तहत दो दर्जन सैन्य विमान और हेलीकॉप्टर नेपाल भेजे गए हैं. विदेश सचिव एस जयशंकर ने एक पत्रकार सम्मलेन में इस बारे में कहा, "नेपाल में हालात बहुत बहुत गंभीर हैं." गृह सचिव एलसी गोयल, रक्षा सचिव आरके माथुर, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकार के अध्यक्ष आरके जैन और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष एलएस राठौड़ भी इस सम्मेलन में मौजूद थे. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकार की ओर से एक हजार लोगों की टीम को राहतकार्य के लिए नेपाल भेजा गया है.

स्थानीय लोगों के अलावा समस्या सैलानियों को निकालने की भी है. ऐसे में विदेशियों को मौके पर भारत का वीजा भी दिया जा रहा है. अब तक एक हजार से अधिक भारतीयों को नेपाल से वापस लाया जा चुका है. इसके अलावा 61 पर्वतारोहियों को भी बचाया गया है. हालांकि 19 पर्वतारोहियों के मारे जाने की खबर है. एस जयशंकर ने कहा कि भारत नेपाल में फंसे विदेशियों पर भी ध्यान दे रहा है लेकिन इस समय भारतीयों को सुरक्षित वापस लाना प्राथमिकता है.

रविवार को नेपाल में दोबारा भूकंप आया जिस कारण हवाई अड्डों को बंद करना पड़ा. जयशंकर ने बताया कि इस दौरान राहतकार्य को भी रोक देना पड़ा जिससे लोगों तक पहुंचने में देर हुई है. उन्होंने बताया कि सरकार ने 35 बसों को लोगों को सुरक्षित भारत लाने के काम पर लगाया है. ये बसें दो रूटों पर चल रही हैं. नेपाल में अब भी फंसे लोगों से धीरज रखने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि भारत उनकी सुरक्षित वापसी को सुनिश्चित करेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर के माध्यम से राज्य सरकारों और सेना की टीमों का आभार व्यक्त किया.

रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने कहा है कि सरकार का मकसद है पड़ोस में किसी भी तरह की आपदा के मौके पर जल्द से जल्द राहतकार्य शुरू करना और सबसे पहले दुर्घटनास्थल पर पहुंच कर मदद मुहैया कराना. भारत सरकार की ओर से दस टन कंबल, पचास टन पानी, 22 टन खाद्य सामग्री और दो टन दवाएं काठमांडू भेजी गयी हैं. सेना के तीन फील्ड अस्पताल भी नेपाल भेजे गए हैं. सैन्य डॉक्टरों को भी नेपाल की ओर रवाना किया गया है. नेपाल में पिछले 80 सालों में इतना भीषण भूकंप नहीं आया है. मलबे के नीचे अब भी सैकड़ों लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है.

आईबी/एमजे (पीटीआई)

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