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दुनिया

"नेपाल में दखल पर चुप नहीं रहेगा चीन"

नेपाल में किसी देश ने हस्तक्षेप किया तो चीन खामोश तमाशा नहीं देखेगा. यह कहना है नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के एक बड़े नेता का, जो अभी अभी चीन से लौटे हैं. उधर भारत ने नेपाल को 7.83 करोड़ रुपये की मदद का एलान किया.

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नेपाल की सीपीएन-यूएमएल पार्टी के सचिव युवराज ग्यावाली बुधवार को चीन से लौटे. उन्होंने चीन दौरे में 11 सदस्यीय नेपाली प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया. ग्यावाली ने कहा कि चीन ने कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं को भरोसा दिलाया है कि अगर कोई देश नेपाल के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी करेगा तो वह चुपचाप तमाशा नहीं देखेगा. उन्होंने चीन के उप प्रधानमंत्री और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सचिवालय के सदस्य हाई योंग के हवाले से बताया, "किसी देश के मामलों में दखल देना हमारी नीति नहीं है और अगर नेपाल में विदेशी हस्तक्षेप होता है तो चीन खामोशी से तमाशा नहीं देखेगा."

माओवादी प्रमुख प्रचंड अकसर भारत विरोधी बयान देते रहे हैं. वह भारत पर नेपाल में दखंलदाजी का आरोप लगाते हैं. नेपाल में सरकार न पाने के लिए भी माओवादी भारत को ही जिम्मेदार ठहराते हैं. नेपाली संसद में माओवादी सबसे बड़ी पार्टी हैं लेकिन प्रधानमंत्री चुनने के लिए हुई कई कोशिशें अब तक नाकाम रही हैं.

गोरखा जिले में माओवादी पार्टी के सम्मेलन में भी नेपाल के अंदरूनी मामलों में विदेशी हस्तक्षेप को रोकने की मांग की गई. माओवादी तो भारत के साथ हुए उन सभी समझौतों को खत्म कर देना चाहते हैं जो उनके मुताबिक बराबरी के आधार पर नहीं किए गए हैं. इनमें 1950 की ऐतिहासिक शांति और मित्रता संधि भी सामिल हैं. माओवादी भारत पर देश की सीमा के अतिक्रमण का भी आरोप लगाते हैं.

ग्यावाली ने चीनी नेता के हवाले से कहा, "नेपाल की शांति प्रक्रिया सिर्फ नेपाल की स्थिति को प्रभावित नहीं करेगी बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र पर इसका असर पड़ेगा. इसलिए चीन चाहता है कि नेपाल की शांति प्रक्रिया और संविधान का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी हो."

इस बीच भारत ने नेपाल को 7.83 करोड़ रुपये की मदद देने का एलान किया है जिसे देश में स्वास्थ्य और शिक्षा का बुनियादी ढांचा बेहतर बनाने पर खर्च किया जाएगा. नेपाल में भारत के राजदूत राकेश सूद ने सुनसारी जिले के धरन में बीपी कोइराला इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ एंड साइंस की आधारिशला रखी. यह संस्थान भारत की तरफ से दी जाने वाली 6.86 करोड़ रुपये की मदद से तैयार होगा जो देश में एमबीबीएस डॉक्टरों की बढ़ती मांग को पूरी करने में मदद करेगा. स्वास्थ्य और शिक्षा की कई और परियोजनाओं के लिए भी भारत नेपाल को मदद देगा.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः वी कुमार

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