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दुनिया

नेपाल में गृहयुद्ध के दौरान लापता लोगों की खोज के लिए खुदाई

नेपाल के अधिकारियों ने कहा है कि 2017 में देश भर में सैकड़ों जगह पर खुदाई की जाएगी ताकि गृह युद्ध के दौरान लापता हुए एक हजार से ज्यादा लोगों के अवशेष तलाशे जा सकें.

नेपाल में पिछले साल एक आयोग का गठन किया गया जिसे देश में दस साल तक चले गृह युद्ध के दौरान लापता हुए लोगों का पता लगाने का काम सौंपा गया. आयोग का कहना है कि उसने लापता लोगों के परिवारों की तरफ से 2,942 शिकायतें मिली हैं.

आयोग के प्रवक्ता बिष्णु पाठक ने बताया, "याचिकाकर्ताओं से लापता हुए लोगों के बारे में जानकारी मिलने के बाद हम खुदाई का काम शुरू करेंगे. लोगों की पहचान की जाएगी और उनके अवशेष परिवारों को सौंपे जाएंगे.” बताया जाता है कि खुदाई का काम फरवरी या मार्च 2017 में शुरू हो सकता है. इसके लिए आयोग ने 500 जगहों की पहचान की है. पाठक ने ये बताने से इनकार कर दिया कि ये जगह कहां पर हैं, लेकिन ये जरूर कहा कि शुरुआती जांच से पता चला है कि कुछ जगहों पर सामूहिक कब्रें हैं.

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उन्होंने कहा, "जिन लोगों को नॉन स्टेट एक्टर्स ने जबरदस्ती गायब किया था, संभावना है कि वो लोग जंगलों या फिर नदियों के पास मिल सकते हैं. वहीं जिन लोगों को सुरक्षा बलों ने गायब किया था वो सैन्य बैरकों या आसपास के इलाकों में पाए जा सकते हैं.”

पाठक ने बताया कि न्यूयॉर्क की एक संस्था इंटरनेशनल सेंटर फॉर ट्रांजिशनल जस्टिस खुदाई के काम में मदद देगी. ये संस्था कई देशों में मानवाधिकार हनन के मामलों की छानबीन में मदद मुहैया कराती है. नेपाल में 1996 से 2006 के दौरान माओवादी विद्रोहियों और सुरक्षा बलों के बीच चले युद्ध में 1,300 लोग लापता हो गए. नेपाल के गृहयुद्ध में 16 हजार लोग मारे गए जबकि दसियों हजार घायल हो गए. इसके बाद नवंबर 2006 में दोनों पक्षों के बीच शांति समझौता हुआ. माओवादियों के नेता प्रचंड इस समय देश के प्रधानमंत्री हैं.

एके/एमजे (डीपीए)

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