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दुनिया

नेपाल भारत में पनबिजली बनाने का समझौता

भारत और नेपाल ने बिजली की किल्लत दूर करने की दिशा में अहम पहल की है. दोनों देशों ने भारतीय कंपनी जीएमआर द्वारा नेपाल में सबसे बड़ा पनबिजली घर बनाने के एक समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं.

हिमाचल की तलछटी में बसे नेपाल में कई सारी तेज बहने वाली नदियां हैं लेकिन वहां बिजली बनाने की क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो रहा है. नेपाल को संप्रभुता पर खतरे की चिंता भारत के साथ किसी भी तरह के समझौते से रोकती रही है. लेकिन अब काफी देरी के बाद समझौता हो गया है जिसके तहत भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी जीएमआर नेपाल के करनाली नदी पर 900 मेगावाट बिजली बनाने का प्लांट लगाएगी. बिजली का उत्पादन 2021 से शुरू होने की संभावना है.

समझौते के हस्ताक्षर के मौके पर नेपाल के दौरे पर गए भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "यह नेपाल और भारत के लिए ऐतिहासिक मौका है." जीएमआर के अनुसार 1.5 अरब डॉलर की करनाली परियोजना से पैदा होने वाली बिजली का 12 फीसदी हिस्सा नेपाल को मुफ्त में दिया जाएगा. बाकी बिजली भारत और बांग्लादेश को बेचे जाने की संभावना है. सार्क देशों की बैठक के लिए काठमांडू पहुंचे राजनाथ सिंह ने कहा, "भारत इस समझौते से बहुत खुश है."

समझौते के तहत नेपाल को कंपनी में 27 फीसदी का शेयर मिलेगा. जीएमआर कंपनी ने बिजली का उत्पादन शुरू होने के 25 साल बाद पूरी परियोजना की मिल्कियत नेपाल को सौंप देने का आश्वासन दिया है. नेपाल के गृह मंत्री बामदेव गौतम ने कहा, "इस समझौते ने लोगों के फायदे में नेपाल के प्राकृतिक संसाधनों के भावी इस्तेमाल की भावी योजनाओं के लिए रास्ता खोल दिया है." इस समय नेपाल सिर्फ 750 मेगावाट बिजली का उत्पादन करता है जो उसकी क्षमता का सिर्फ दो फीसदी है. यह नेपाल की अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भी काफी नहीं है.

नेपाल में फिलहाल 12 घंटे की लोडशेडिंग करनी पड़ती है. इसके अलावा उसे भारत से ईंधन खरीदना पड़ता है जो खुद पेट्रोलियम का आयात करता है. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के साथ ऊर्जा संबंध बढ़ाने की पहल की है और उन्हें अपनी नेपाल यात्रा के दौरान करनाली परियोजना पर तेज फैसले का आश्वासन मिला था. हालांकि परंपरागत रूप से नेपाल में भारत का प्रभाव रहा है लेकिन हाल के सालों में चीन ने वहां ढांचागत परियोजनाओं में अरबों का निवेश किया है.

एमजे/एजेए (एएफपी)

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