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दुनिया

नेपाल और भारत में भूकंप में हजारों मौतें

नेपाल और भारत में भयानक भूकंप के एक दिन बाद नए तीव्र झटके आए हैं. नेपाल और भारत में भूकंप में 2500 से ज्यादा लोगों की जान गई है. राहत और बचाव कर्मी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. दुनिया भर की सरकारें आपात मदद दे रही हैं.

नेपाल में दो दिन में आये जबरदस्त भूकंप के कारण मरने वालों की संख्या 2500 के पार पहुंच गई है और हजारों की संख्या में लोग घायल हो गए हैं इस बीच बारिश शुरु हो जाने से राहत एवं राहत कार्य में बाधा पैदा हो रही है. लोगों में इस कदर डर का माहौल है कि वह घरों से बाहर टेंट लगाकर बैठे हुए हैं.

प्रशासन के अनुसार भूकंप से मरने वालों की संख्या 2500 से ज्यादा है जबकि 6492 लोग घायल है. पुलिस ने बताया कि काठमांडू में कम से कम 1100 लोग मारे गए है. एवरेस्ट बेस कैंप से रोमानिया के पर्वतारोही अलेक्स गैवन ने बताया है कि नए झटके की वजह से हिमालय में तीन नए हिमस्खलन हुए हैं.

मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है. माउंट एवरेस्ट बेस कैंप में 17 लोगों के शव मिले हैं और हिमस्खलन में कैंप का एक हिस्सा ढह जाने से 61 लोग घायल भी हुए हैं. सरकार पीड़ितों को आश्रय प्रदान करने के लिए टेंट लगा रही है और सरकारी स्कूलों एवं अन्य सरकार भवनों में पर्याप्त इंतजाम करा रही है.

भूकंप के कारण भारत की राजधानी दिल्ली और कोलकाता में मेट्रो ट्रेन सेवाओं को रोक दिया गया. प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार भूकंप की वजह से राजस्थान के भरतपुर में दीवार गिरने से आठ लोग घायल हो गए. देश में कल भूकंप की वजह से बिहार में 35 ,उत्तर प्रदेश में 12 और पश्चिम बंगाल में तीन लोगों की मौत हुई.

नेपाल में हिमालय क्षेत्र में शनिवार को दोपहर 11 बजकर 41 मिनट पर पोखरा के समीप लारजंग से 35 किलोमीटर दूर केन्द्रित 7.8 तीव्रता के भूकंप के बाद रविवार को भारतीय समयानुसार रात आठ बजे तक 46 झटके और आ चुके हैं जिससे नेपाल एवं उत्तर भारत में लोगों में आज भी दहशत बनी रही. कम से कम दो झटकों की तीव्रता 6.7 और 5.3 रही.

भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक एल एम राठौड़ ने आज बताया कि यूरेशियन और भारतीय उपमहाद्वीपीय प्लेटों के घर्षण के कारण यह भूकंप आया है और यह भूकंप अपेक्षित था. उन्होंने बताया कि भूकंप के बाद जमीन से ऊर्जा निकलने के कारण ये झटके आ रहे हैं और ये तब तक आते रहेेंगे जब तक कि दोनों प्लेटें ठीक से बैठ ना जाएं. इसमें कुछ हफ़्तों से लेकर एक साल तक लग सकता है.

एमजे (एएफपी, वार्ता)

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