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दुनिया

नेपाली सरकार को माओवादियों का झटका

नेपाल में ताजा राजनीतिक उहापोह के बीच अब प्रधानमंत्री को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ेगा. हिमालय की गोद मे बसा ये देश 2015 के भीषण भूकंप से उबरने के लिए अभी भी संघर्ष कर रहा है.

Indien Treffen Modi und Oli

नेपाली प्रधानमंत्री के रूप में अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर फरवरी 2016 में भारत पहुंचे ओली.

माओवादी दल के समर्थन वापस लेने के कारण नेपाल के प्रधानमंत्री खड़ग प्रसाद ओली की 9 महीने पुरानी सरकार खतरे में पड़ गई है. सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे पूर्व माओवादी विद्रोहियों ने विपक्षी नेपाली कांग्रेस पार्टी से हाथ मिला लिया है. अब प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा और ओली को संसद में बहुमत साबित करना होगा.

नेपाल में राजनीतिक संकट कई सालों से जारी हैं. एक बार फिर वर्तमान सरकार को अस्थिर करने का बहुत बड़ा प्रयास हुआ है. अक्टूबर 2015 में ही सत्ता में आए प्रधानमंत्री ओली पर माओवादियों ने उनसे किए वादे तोड़ने का आरोप लगाया और सरकार से समर्थन वापस ले लिया. माओवादियों ने उन पर देश के नए संविधान को लेकर दक्षिणी नेपाल में व्याप्त जनता के गुस्से को ठंडा ना कर पाने और भूकंप प्रभावित इलाकों में पर्याप्त निर्माण कार्य करवाने में असफल रहने का आरोप लगाया है.

माओवादी दल की प्रवक्ता पम्फा भूसाल ने बताया, "हमने प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए आवेदन दाखिल करा दिया है." उन्होंने कहा कि उनके दल के समर्थन के बिना ओली सरकार अल्पमत में आ गई है और उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए. नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता ने भी माओवादी दल को दिए समर्थन की पुष्टि करते हुए बताया कि यह प्रस्ताव वोटिंग के लिए अगले सप्ताह संसद में लाया जाएगा.

नेपाल में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए उसकी उत्तरी सीमा से लगे पड़ोसी चीन और बाकी तीनों दिशाओं से लगे पड़ोसी देश भारत में आपस में होड़ रहती है. पिछले साल नेपाल में आए भीषण भूकंप से अभी देश उबर भी नहीं पाया है कि राजनीतिक अस्थिरता का यह गंभीर संकट खड़ा हो गया. पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर दोनों पड़ोसी देशों भारत और चीन की पैनी नजर रहेगी.

239 सालों से नेपाल में चली आ रही राजशाही को खत्म कर बनी लोकतांत्रिक सरकारों के इतिहास को देखें तो 2008 से अब तक सात प्रधानमंत्री बदले जा चुके हैं. सातवें पीएम ओली को हटाने के लिए माओवादियों ने मई में भी तैयारी की थी लेकिन बाद में आपसी सहमति बनाने पर काम करने का निर्णय लिया.

ओली के प्रेस प्रवक्ता ने बताया है कि वे प्रधानमंत्री बने रहेंगे और अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेंगे. माओवादियों और कांग्रेस के साथ आ जाने के कारण अब 595 सीटों वाली नेपाली संसद में कोई भी कानून पास करवाने के लिए ओली की सरकार को कई छोटी पार्टियों का समर्थन जुटाना होगा, जो कि राजनीतिक विशेषज्ञों को फिलहाल काफी मुश्किल दिखाई दे रहा है. सरकार के गिरने की स्थिति में प्रचंड के नाम से जाने जाने वाले माओवादी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल 64 वर्षीय ओली की जगह ले सकते हैं.

पिछले सितंबर में नेपाल ने अपना नया संविधान स्वीकार किया. लेकिन उसके खिलाफ देश के अल्पसंख्यक मधेसी समुदाय ने काफी कड़ा विरोध जताया. भारत से लगी नेपाल की सीमा पर चार महीने तक सीमा की नाकेबंदी रही. यहां हुई हिंसा की चपेट में आने से 50 लोगों की मौत हो गई थी और नेपाल का आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ था. 1990 में नेपाल में संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली की शुरुआत हुई और तबसे अब तक यहां 23 सरकारें बन चुकी हैं.

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