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खेल

नेपाली फुटबॉल में अफ्रीकी रंग

दर्जनों अफ्रीकी खिलाड़ी नेपाल में फुटबॉल खेल रहे हैं. वह युवाओं को फुटबॉल के गुर भी सिखा रहे हैं. खट्टे मीठे अनुभवों के बावजूद अफ्रीकी खिलाड़ी चाहते हैं कि नेपाल उन्हें बार बार बुलाए.

पड़ोसी गहरी नींद में होते हैं लेकिन एक कमरे में सुबह चार बजे अलार्म बजता है. अफ्रीका के डोए म्बारगा पिएर ठंड की परवाह किये बिना बिस्तर छोड़ते हैं. हाफ पैंट के ऊपर जींस कसते हैं. पैरों में जूते, सिर पर टोपी और भाप छोड़ती सांस के साथ अंधेरे में मैदान की तरफ निकल पड़ते हैं. मैदान में उन्हीं के जैसे कई युवा मौजूद रहते हैं. सभी हाथ मिलाते हैं, टीम बांटते हैं और खेल शुरू.

पिएर समेत कई अफ्रीकी फुटबॉलर इन दिनों नेपाल की राजधानी काठमांडू में हैं. वे नेपाली युवाओं को फुटबॉल के गुर सिखा रहे हैं. हेर्वे को काठमांडू में लोग प्यार से पीटर कहना पसंद करते है. अफ्रीकी खिलाड़ियों की वजह से नेपाल में इस वक्त 16 फुटबॉल क्लब चल रहे हैं. इनमें 51 अफ्रीकी फुटबॉलर खेल रहे हैं. सैम्युएल एटो जैसे दिग्गज तो फुटबॉल के साथ छुट्टियों का लुत्फ भी उठा रहे हैं. एटो सबसे मंहगे खिलाड़ियों में से एक हैं, फिलहाल वह रूसी क्लब आंझी माखाचकाला के लिए खेल रहे हैं.

पीटर कहते हैं, "एटो और मैं एक ही अकादमी से ट्रेनिंग पा चुके हैं. आज वो कहां हैं और मैं कहां, जिंदगी तो ऐसी ही है." पीटर काठमांडू में ही रहने लगे हैं. दोपहर में खाली वक्त मिलने पर वह अपने पडो़सियों से गप्पें लड़ाना पंसद करते हैं. उनकी नेपाली टूटी फूटी है लेकिन काम चल जाता है.

नेपाल में फुटबॉल बहुत लोकप्रिय है, लेकिन खेल का अंतरराष्ट्रीय मंच पर कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. खेल का स्तर बढा़ने के लिए नेपाल बीते पांच साल से अफ्रीकी खिलाड़ियों को वर्क परमिट दे रहा है. अखिल नेपाल फुटबॉल संघ के सीईओ इंद्रमन तुलाधर कहते हैं, "फुटबॉल क्लबों की संख्या बढ़ती जा रही हैं लेकिन देश में खिलाड़ियों की भारी कमी है."

तुलाधर के मुताबिक प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कमी की वजह से ही क्लब विदेशी खिलाड़ियों में दिलचस्पी लेने लगे हैं, "क्लबों के लिए अफ्रीकी खिलाड़ी लेना ज्यादा सस्ता है क्योंकि नेपाली खिलाड़ियों के साथ साल भर का करार करना पड़ता है, यह बहुत खर्चीला है. मेहनती अफ्रीकी खिलाड़ी नेपाली युवाओं को खेल के साथ अनुशासन भी सिखा रहे हैं." अफ्रीकी खिलाड़ियों में ज्यादातर कैमरून, आइवरी कोस्ट, सेनेगल और नाइजीरिया के हैं.

नेपाली एजेंट अफ्रीकी खिलाड़ियों को 5,000 डॉलर प्रतिमाह देने का वादा करते हैं. लेकिन ज्यादातर विदेशी खिलाड़ियों को बहुत कम पैसा दिया जाता है. कइयों को तो सिर्फ 1,000 डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में 55,000 रुपये महीना ही दिया जाता है. अफ्रीकी खिलाड़ियों के मुताबिक नेपाल पहुंचने के बाद ही उन्हें सही जानकारी मिल पाती है.

पीटर सकारात्मक बातों पर ज्यादा जोर देते हैं. कहते हैं, "यहां आने के बाद ही मैंने नेपाल को जानना शुरू किया. मुझे यहां के लोग दोस्ताना लगते हैं. मुझे तोहफे मिले हैं, मुझे त्योहारों में शामिल होने का न्योता मिलता है." पीटर चाहते हैं कि वह बार बार नेपाल आएं. उनके दिल में यह ख्बाव भी है कि शायद नेपाल में उन्हें सच्चा प्यार मिल जाए.

हालांकि कुछ खिलाड़ियों का अनुभव अलग है. 18 महीने से नेपाल में रह रहे माम्बो के मुताबिक विदेशी खिलाड़ी होने के नाते क्लब आपसे बहुत ज्यादा उम्मीदें करने लगते हैं, "आपको हर वक्त अपना 100 फीसदी योगदान देना पड़ता है." माम्बो को यह बात भी बुरी लगती है कि बाजार या गलियों में घूमते वक्त बच्चे उन्हें देखकर हंसते हैं. लोग दूर से ही उन्हें घूरते हैं.

ओएसजे/एमजे (डीपीए)

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