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विज्ञान

नेत्रहीनों की शानदार चीनी पेंटिंग

कमरे में सब कुछ है. चमकदार रोशनी, पेंटिंग कैनवस, ब्रश और छात्र, डिब्बों में अलग अलग रंग और ट्रेनर जेन बाइलियांग. लेकिन खास बात यह है कि यहां जमा सभी छात्र नेत्रहीन हैं, जो उत्साह से पारंपरिक चीनी पेंटिंग सीख रहे हैं.

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चीन के दक्षिणी ग्वांगशी प्रांत की राजधानी नैनिंग में ये छात्र घंटों कूची और विशेष पेंटिंग पेपर पर अपने हाथ आजमाते रहते हैं. इन कागजात पर गीले और सूखे क्षेत्र हैं, जिन्हें टटोल कर वे तय कर रहे हैं कि कहां कौन सा रंग भरना है.

वे इस कदर एक्सपर्ट हो गए हैं कि चीनी लेखन में इस्तेमाल की जाने वाली खास कूची को काले रंग की स्याही में डुबो रहे हैं और इससे कभी ऊंचे पहाड़ तो कभी छोटे परिंदे बना रहे हैं.

55 साल के जेन कई दशकों से नेत्रहीनों को पेंटिंग सिखा रहे हैं. उन्होंने सिखाने का तरीका खुद ही बनाया है और कहते हैं कि ऐसे छात्रों को पेंटिंग सिखा कर उन्हें बड़ी संतुष्टि मिलती है. वह पेंटिंग सिखाने के आम तरीके को बेकार मानते हैं और कहते हैं कि हर पेंटर की कला अलग होती है और हर एक पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है.

जेन कहते हैं, "मैं अलग अलग छात्रों को अलग अलग तरीके से सिखाता हूं. हमें घिसे पिटे तरीके नहीं अपनाने चाहिए. निश्चित तौर पर वे आसान होते हैं लेकिन उनसे कलात्मकता खत्म हो जाती है. हर शख्स अलग होता है. उसकी समझ अलग होती है और हमें उसका सम्मान करना चाहिए. मैं यह देखना चाहता हूं कि कौन किस क्षेत्र में अच्छा है और उसी के आधार पर उन्हें ट्रेनिंग देता हूं."

जेन बताते हैं कि एक अनाथ नेत्रहीन बच्चे ने उनकी दुनिया बदल दी. उन्होंने दशकों पहले एक नेत्रहीन बच्चे को रेत में कुछ लकीरें खींचते देखा. जब जेन ने पूछा कि वह क्या कर रहा है, तो बच्चे ने पूरे विस्तार से बताया कि वह एक ऐसा लाल रंग का कीड़ा बना रहा है, जिसकी काली टांगें और आंखें हैं. यह बात सुन कर जेन भौंचक्के रह गए और उन्होंने तभी से नेत्रहीनों को पेंटिंग सिखाने का इरादा कर लिया.

जेन का कहना है कि उनका पहला काम नेत्रहीनों के दिल में रोशनी पैदा करना होता है और वह यह काम पिछले करीब 40 साल से कर रहे हैं. उनका कहना है कि कला के क्षेत्र में नेत्रहीन बेहतर काम कर सकते हैं क्योंकि उनकी दूसरी ज्ञानेंद्रियां ज्यादा सक्षम होती हैं. वह हर छात्र पर पूरा ध्यान देने की कोशिश करते हैं.

वह एक सस्ते किराए के कमरे में नेत्रहीन छात्रों को पेंटिंग सिखाया करते थे लेकिन इसके बाद बिजली के उपकरण बनाने वाले एक बिजनेसमैन ने उन पर ध्यान दिया और उन्हें इस काम के लिए जगह दे दी.

लेकिन उनका रास्ता इतना आसान भी नहीं रहा है. उनके कई साथी पेंटरों ने उनके काम को बेकार बताया है. कुछ का तो यहां तक कहना है कि नेत्रहीनों को पारंपरिक चीनी तकनीक से पेंटिंग सिखाने से कोई फायदा नहीं होने वाला. इसके अलावा कई छात्र कुछ क्लास के बाद ही सीखना छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इस काम से वह अपनी रोजी रोटी नहीं चला सकते.

इससे बचने के लिए जेन ने अपने पैसे से एक रोजगारपरक स्कूल खोला है, जहां चीनी पेंटिंग के अलावा छात्रों को एक्यूपंक्चर और मसाज देने की ट्रेनिंग भी दी जाती है. चीन में नेत्रहीन लोगों को इन दोनों क्षेत्रों में काम के लिए बढ़ावा दिया जाता है. कई छात्र अब एक साथ ये सभी ट्रेनिंग पाकर खुश हैं.

रिपोर्टः रॉयटर्स/ए जमाल

संपादनः एस गौड़