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दुनिया

निसान ने भारत के खिलाफ दायर किया मुकदमा

भारत-जापान के रिश्तों की गर्माहट से दुनिया वाकिफ है. लेकिन जापान की ऑटोनिर्माता कंपनी निसान भारत सरकार से नाराज नजर आ रही है. कंपनी ने इंटरनेशनल ऑर्बिट्रेशन में भारत के खिलाफ 5,000 करोड़ रुपये का मुकदमा दर्ज कराया है.

पूरा मामला बकाया स्टेट इंसेन्टिव भुगतान से जुड़ा हुआ है. कंपनी ने 2,900 करोड़ रुपये के बकाया इंसेन्टिव और 2,100 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति, ब्याज आदि के रूप में मांगे हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, कंपनी ने पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे नोटिस में इस बात की जानकारी थी. नोटिस में तमिलनाडु सरकार से इंसेन्टिव के तौर पर बकाया भुगतान की मांग की गयी थी.

कंपनी ने साल 2008 में तमिलनाडु सरकार के साथ एक समझौते के तहत कार मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट लगाया था. जिसके तहत राज्य सरकार ने तमाम इंसेन्टिव और टैक्स छूट कंपनी को देना तय किया था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

नोटिस में कंपनी ने बताया कि निसान की ओर से साल 2015 के बकाया भुगतान के लिए किये गये बार-बार अनुरोध की राज्य अधिकारियों ने अनदेखी की. इसलिए कंपनी के चैयरमेन कॉर्लोस घोस्न ने केंद्र सरकार से मदद मांगी. लेकिन निसान को कोई मदद नहीं दी गयी. केंद्रीय सरकार के कई मंत्रालयों से जुड़े अधिकारियों ने कंपनी के साथ बैठकें भी की. इन बैठकों को कंपनी को हर बार यही आश्वासन दिया गया कि भुगतान कर दिया जायेगा और कंपनी कोई कानूनी प्रक्रिया में न उलझे. लेकिन बीते अगस्त निसान ने भारत सरकार को अल्टीमेटम दे दिया कि इस मामले में कोई ऑर्बिट्रेटर नियुक्त किया जाना चाहिये. इसकी पहली सुनवाई दिसंबर मध्य में होनी थी. निसान के प्रवक्ता ने कहा, "कंपनी भारत सरकार के साथ एक प्रस्ताव के तहत कार्य करने को प्रतिबद्ध थी." हालांकि इस मसले पर प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है. 

तमिलनाडु सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार उम्मीद कर रही थी कि मामला इंटरनेशनल ऑर्बिट्रेशन में जाये बिना सुलझ जायेगा. उन्होंने कहा कि बकाया राशि को लेकर कोई समस्या नहीं थी और हम इस पूरे मसले को सुलझाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं.

इस मामले में भारत पर जापान के साथ बनी, कॉम्प्रीहेनसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एंग्रीमेंट के उल्लघंन का आरोप है. इसी के साथ भारत पर इंटरनेशनल ऑर्बिट्रेशन में भारत के खिलाफ अब तक 20 मुकदमे हो गये हैं. यह किसी भी एक देश के खिलाफ दायर अब तक के सबसे अधिक मामले हैं. 

तमाम ऑटोनिर्माता कंपनी मसलन फोर्ड, हुंडई मोटर्स ने तमिलनाड़ु में प्लांट लगाये थे. कंपनियों के इस उत्साह को देखते हुए चेन्नई को, "दक्षिण एशिया का डेट्रॉयट" भी कहा गया. लेकिन अब कंपनियों का भरोसा राज्य पर डगमगा रहा है. साल 2008 में निसान ने अपने वैश्विक पार्टनर फ्रेंच कारनिर्माता कंपनी रेनॉल्ट के साथ चेन्नई में एक कार विनिर्माण इकाई बनाने के लिए निवेश किया था. इस निवेश सौदे में राज्य सरकार ने तमाम इंसेन्टिव समेत टैक्स छूट का वादा किया गया था. जिसे लेकर अब निसान और राज्य सरकार के बीच विवाद कायम है.

निसान के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी भारत के बाजारों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 40,000 नौकरियां देती हैं. 

एए/ओएसजे (रॉयटर्स)

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