निजी मिनी कॉप्टर का सपना कब होगा पूरा | विज्ञान | DW | 02.12.2014
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विज्ञान

निजी मिनी कॉप्टर का सपना कब होगा पूरा

ट्रैफिक जाम में फंसे कई कार चालकों का सपना होता है कि काश वह मिनी हेलिकॉप्टर के जरिए इस मुसीबत से निकल जाए. लेकिन चार साल से जारी रिसर्च के बावजूद 'माई कॉप्टर' का सपना जल्द साकार होता नहीं दिख रहा है.

छह यूरोपीय अनुसंधान संस्थानों द्वारा निजी हवाई वाहनों पर चार साल के व्यवहार्यता अध्ययन के बाद यह जल्द वास्तविकता बनता नहीं दिख रहा है. जर्मन एयरोस्पेस सेंटर के इंस्टीट्यूट ऑफ फ्लाइट सिस्टम्स के प्रमुख श्टेफान लेफेडाग के मुताबिक, "किसी और चीज के मुकाबले यह ज्यादा बड़ा सपना है." लेफेडाग ठोस कानून और प्रमाणीकरण के मुद्दों की ओर इशारा करते हैं. सुरक्षा चिंता और व्यावहारिक समस्या का भी मुद्दा है जो निजी हवाई वाहन (पीएवी) के पायलट द्वारा उठाया जा चुका है. इस प्रोजेक्ट के लिए यूरोपीय संघ ने करीब 34 लाख यूरो की वित्तीय सहायता दी है. इस प्रोजेक्ट का नाम "माई कॉप्टर" रखा गया है.

लेफेडॉग के मुताबिक हालांकि अभी तक पीएवी का कोई प्रोटोटाइप नहीं है, लेकिन वैसा एक तैयार करना उतना मुश्किल नहीं होगा. वे कहते हैं, "आज हम उड़ने वाली कार बना सकते हैं." उनके मुताबिक वह बहुत महंगी है और बहुत व्यावहारिक भी नहीं, हालांकि वे मात्र कारें हैं और बहुत खराब एयरक्राफ्ट हैं."

लेकिन तकनीकी तौर पर माई कॉप्टर बनाना मुमकिन है. माई कॉप्टर वेबसाइट पर एक कलाकार ने पीएवी की कल्पना का चित्रण किया है. जिसमें एक छोटा और भविष्य का विमान है. लेफेडाग कहते हैं सबसे मुश्किल काम है सुचारू रूप से हवाई यातायात प्रणाली को संभालना जहां हजारों शौकिया उड़ान भरने वाले होंगे. आखिरकार आबादी में हर कोई एक प्रमाणित पायलट नहीं है.

माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल साइबरनेटिक्स के प्रबंध निदेशक हाइनरिष बॉयलठॉफ के मुताबिक, "हम यह पेशेवर विमान योग्यता वाले लोगों के लिए आरक्षित नहीं करना चाहते हैं." वे कहते हैं कि एक ऐसे प्रोग्राम को विकसित किया गया है जिसके तहत मोटर चालक फ्लाइट सिमुलेटर पर पांच घंटे की ट्रेनिंग के बाद निजी कॉप्टर पर उड़ान भर सकेगा.

एए/एसएफ (डीपीए)

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