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दुनिया

नायकों को इज्ज़त नहीं

चीन की उप विदेश मंत्री फू यिंग ने इस साल के नोबेल पुरस्कार विजेता लिउ शियाओबो को 'अजीब' कहा. फू ने सवाल उठाया है कि चीन के असली नायकों को किसी पुरस्कार के लिए नामांकित क्यों नहीं किया गया.

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लियू शियाओबो

माराकेश में विश्व नीति पर बैठक के लिए पहुंची फू ने कहा, "नोबेल समिति चीन से हमेशा अजीब लोगों को नामांकित करती है". हो सकता है कि इस वाक्य से वे दलाई लामा की ओर भी संकेत कर रही थीं जिन्हें 1989 में शांति पुरस्कार से नवाज़ा गया.

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1989 में नोबेल से सम्मानित

फू ने कहा, "अगर आप चीन के हैं, तो आप बस चीन के खिलाफ कुछ अजीब सा कर दें और आप पुरस्कार के लिए नामांकित किए जाएंगे." फू की दलील है कि किसी भी ऐसे व्यक्ति को क्यों पुरस्कार देना चाहिए जिसने चीन को सात भागों में बांट देने का सुझाव दिया हो.

साथ ही फू ने कहा कि चीन के नायकों को शायद कभी भी इस तरह की इज्जत न मिले. उनका मतलब उन वैज्ञानिकों से था जिन्होंने चीन के 1.3 अरब से ज्यादा नागरिकों के पेट भरने के लिए नए खोज किए और गरीबी घटाने में मदद की. मिसाल के तौर पर वैज्ञानिक युआन लोंगपिंग जिन्हें कई लोग 'हाइब्रिड चावल के पिता' मानते हैं. फू के मुताबिक उन्हें विश्वास था कि युआन जरूर नामांकित किए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि चीन की भाषा में शांति के लिए चिह्न या अक्षर के दो भाग होते हैं, एक भाग मुंह दर्शाता है और एक चावल. फू के मुताबिक, चीन के इतिहास में माना जाता है कि विश्व में शांति तभी आ सकती है जब सबके पेट भरे हों.

रिपोर्टःएएफपी/एमजी

संपादनः एन रंजन