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दुनिया

नामुमकिन तो नहीं मुश्किल है असांज को पकड़ना

अमेरिका में विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज को देशद्रोही और आतंकवादी जैसे तमगे दिए जा रहे हैं. राजनेता और अधिकारी उन्हें पकड़ने और सजा देने के रास्ते तलाश रहे हैं. लेकिन अमेरिका के लिए असांज को पकड़ना आसान नहीं होगा.

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जूलियन असांज

जानकारों का मानना है कि असांज पर मुकदमा चलाने का रास्ता कानूनी अड़चनों से भरा पड़ा है. इसमें सबसे बड़ी बाधा तो अमेरिकी संविधान का पहला संशोधन ही है जो अभिव्यक्ति की आजादी देता है. अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ ब्रूस जैगरिस बताते हैं, "मेरा यकीन कीजिए इस वक्त न्याय मंत्रालय में कई वकील जूलियन असांज को फंसाने के रास्ते तलाश रहे हैं."

अमेरिका ने विकीलीक्स के जुलाई में किए गए खुलासे के बाद से ही आपराधिक जांच शुरू कर रखी है. लेकिन अब वेबसाइट के तीसरे खुलासे के बाद तो उसे काफी शर्मिंदगी

Julian Assange

झेलनी पड़ रही है और ऐसा लग रहा है कि वह तिलमिलाया हुआ है. इस बार विकीलीक्स ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय से जुड़े गोपनीय संदेश उजागर कर दिए हैं. इन संदेशों में कई देशों के बारे में अमेरिकी अधिकारियों की टिप्पणियां हैं. इन टिप्पणियों के सामने आने के बाद उसकी विदेश नीति की असलियत सामने आ गई है. इसलिए अधिकारियों पर जूलियन असांज के खिलाफ कार्रवाई का काफी दबाव है.

अटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर ने सोमवार को इस बात के संकेत दिए कि अमेरिका खुद असांज को पकड़ सकता है और इसके लिए वह कुछ भी करने को तैयार है. उन्होंने कहा, "अगर हमारे कानूनों में कुछ कमियां हैं तो अपराधियों को पकड़ने के लिए हम वे कमियां भी दूर करेंगे. अब इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि वह किस देश के नागरिक हैं. वह कहीं के भी हों, जांच के निशाने पर होंगे."

रिपब्लिकन सांसद पीटर किंग ने तो विदेश मंत्रालय से कहा है कि विकीलीक्स को विदेशी आतंकवादी संगठन करार कर दिया जाए.

जूलियन असांज को पकड़ने का सबसे अहम रास्ता एस्प्योनाज एक्ट है जो पहले विश्वयुद्ध के दौरान 1917 में पास किया गया था. इसके तहत ऐसे किसी भी व्यक्ति पर कार्रवाई की जा सकती है जो रक्षा मामलों से जुड़ा कोई भी दस्तावेज अपने पास रखता है या रखने के लिए सहमत होता है. लेकिन जानकार इस कानून की सफलता को लेकर सशंकित हैं. ड्यूक यूनिवर्सिटी में कानून पढ़ाने वाले स्कॉट सिलीमान कहते हैं, "यह मुश्किल हो सकता है. आपको यह साबित करना होगा कि असांज ने खुद सूचनाएं पाने की कोशिश की."

हालांकि देशद्रोह के आरोप में असांज को मौत की सजा की संभावना को जानकार पूरी तरह खारिज करते हैं. जैगरिस बताते हैं, "यूरोपीय संघ में प्रत्यर्पण के नियम मौत की सजा के खिलाफ है. जो राजनेता असांज के लिए मौत की सजा की मांग कर रहे हैं वे मामले को और ज्यादा उलझा रहे हैं. इससे कानूनी और कूटनीतिक अड़चनें बढ़ेंगी."

जैगरिस मानते हैं कि आने वाले दिनों में इंटरपोल के जरिए ब्रिटेन में असांज को गिरफ्तार किया जा सकता है. स्वीडन में चल रहा बलात्कार का मामला भी इसका आधार हो सकता है. लेकिन अमेरिका का फर्स्ट अमेंडमेंट असांज के पक्ष में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकता है.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः एस गौड़

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