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दुनिया

नाटो हमले में 5 अफगान सैनिकों की मौत

अफगानिस्तान के लोगार प्रांत में नाटो के हवाई हमले में अफगान सेना के पांच जवान मारे गए हैं. बताया जा रहा है कि नाटो का हवाई हमला गलती से हुआ.

नाटो गठबंधन और अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने हमले में हुई मौतों की पुष्टि की है. हवाई हमला लोगार प्रांत के चाख जिले में हुआ. अफगानिस्तान के प्रवक्ता जनरल जहीर अजिमी ने बताया कि इस हमले में अफगानिस्तान राष्ट्रीय सेना के आठ और जवान भी घायल हुए. अजिमी ने कहा है कि हमले की जांच जारी है. प्रवक्ता का कहना है कि इस हादसे से अफगान रक्षा मंत्री और मंत्रालय के सभी कर्मचारी दुखी है. विदेशी फौज की प्रवक्ता मेजर कैथलीन स्नो ने एसोसिएटेड प्रेस को ईमेल में बताया है कि अफगान सेना के 5 जवान देश के पूर्वी हिस्से में सैन्य कार्रवाई में गलती से मारे गए हैं. उन्होंने इस बात का उल्लेख नहीं किया कि इस कार्रवाई में विमान शामिल थे या मौत हवाई हमले का नतीजा है.

स्नो ने बताया, "हम इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि अफगान सेना के पांच जवान सैन्य ऑपरेशन में गलती से मारे गए हैं. इस समय जांच जारी है, जिसमें इस बात का पता लगाया जा रहा है कि किन हालात में यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी." इससे पहले प्रांतीय सरकार के प्रवक्ता ने कहा था कि हवाई हमले में 17 जवान घायल हुए हैं. हवाई हमले के बाद हो सकता है कि राष्ट्रपति हामिद करजई देश में मौजूद नाटो और अमेरिकी सेना के खिलाफ मौखिक हमले तेज कर दे. करजई विदेशी सेना की कार्रवाई में नागरिकों की मौत की कड़ी आलोचना करते रहे हैं. करजई के रिश्ते अमेरिका के साथ हाल के सालों में बिगड़े हैं.

लेकिन पिछले साल करजई की भाषा और कठोर हो गई. उन्होंने विदेशी फौज पर कब्जा करने वाला, तालिबानी चरमपंथियों से सांठगांठ और लापरवाही से अफगान नागरिकों की हत्या करने के आरोप लगाए थे. रिश्तों में आते उतार चढ़ाव की वजह से करजई सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं.

करजई ने समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने के कारणों में से एक नागरिकों की मौत का हवाला दिया है. उन्होंने अमेरिका से नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी मांगी है. इससे पहले करजई ने आदेश दिया था कि गठबंधन सेना को हवाई हमले से पहले अफगान रक्षा मंत्रालय से मंजूरी लेनी जरूरी है. द्विपक्षीय समझौते के तहत प्रस्तावित था कि अमेरिकी और नाटो सैनिकों के अफगानिस्तान से 2014 के अंत में वापसी के बाद भी कुछ सैन्य दल अफगानिस्तान में रह कर आतंकवाद निरोधी अभियानों और सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अफगानिस्तान की मदद करेंगे. लेकिन डील पर साइन नहीं होने से अमेरिका ने 2014 के आखिर में अपने सैनिक पूरी तरह से हटा लेने की चेतावनी दी है.

एए/एएम (एपी, एएफपी,)

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