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मनोरंजन

नहीं होगा लिविंग रूम का अगला सेशन

मशहूर सितारवादक पंडित रविशंकर का 92 साल की उम्र में अमेरिका के कैलिफोर्निया में निधन हो गया है. उन्होंने बीटल्स के साथ सहयोग के जरिए सितार को पश्चिमी दुनिया में लोकप्रिय कराया.

उन्हें कई दिनों से सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. उनके परिवार ने एक बयान में कहा है वे कई सालों से कमजोर चल रहे थे और पिछले गुरुवार को उनका ऑपरेशन हुआ था. "हालांकि यह दुख और सदमे का समय है, लेकिन यह हम सबके लिए शुक्रिया कहने का भी वक्त है कि हमें उन्हें अपने जीवन का हिस्सा बनाने का मौका मिला. वे हमारे दिलों और अपने संगीत में हमेशा जिंदा रहेंगे."

एक युग का अंत

भारत में पद्म विभूषण और भारत रत्न से सम्मानित पंडित रविशंकर के निधन पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, बॉलीवुड हस्ती जावेद अख्तर समेत कई दूसरे जानी मानी शख्सियत ने शोक जताया है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक ट्विटर संदेश में पंडित रविशंकर को "राष्ट्रीय धरोहर और भारत की सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक राजदूत" बताया है. प्रधानमंत्री ने कहा, "पंडित रविशंकर के निधन से एक युग का अंत हो गया है. मेरे साथ पूरा देश उनकी प्रतिभा, कला और विनम्रता को श्रद्धांजलि देता है."

पंडित रविशकर के निधन पर जावेद अख्तर ने कहा कि देश का संगीत अनाथ हो गया. पंडित राजन मिश्र ने तीन बार ग्रैमी पुरस्कार जीतने वाले संगीतकार के निधन को बहुत बड़ी क्षति बताते हुए कहा कि उनके न रहने से शास्त्रीय संगीत को बहुत बड़ा धक्का लगा है. बिरजू महाराज ने कहा कि पंडित जी के निधन की खबर पर यकीन कर पाना बेहद मुश्किल है.

दिल की तकलीफ

पंडित रविशंकर को पिछले सालों में सांस और दिल की तकलीफ थी. पिछले हफ्ते सेन डियेगो के अस्पताल में दिल का वाल्व बदलने के लिए उनकी सर्जरी की गई थी. सर्जरी सफल रही लेकिन वे स्वस्थ होने में नाकाम रहे. उनकी पत्नी सुकन्या और बेटी अनुश्का ने कहा, "दुर्भाग्य से सर्जनों और डॉक्टरों के बेहतरीन प्रयासों के बावजूद उनका शरीर सर्जरी का बोझ नहीं उठा पाया. हम उनके पास थे, जब उनका देहांत हुआ."  

पंडित रविशंकर भारत और अमेरिका में रहते थे. सुकन्या और अनुश्का के अलावा वे ग्रैमी विजेता बेटी नोरा जोन्स, तीन पोते-पोती और चार परपोते छोड़ गए हैं. उन्होंने अपना अंतिम कंसर्ट बेटी अनुश्का के साथ पिछले 4 नवम्बर को कैलिफोर्निया के लॉन्ग बीच पर दिया. सर्जरी के एक दिन पहले ही उन्हें उनके अंतिम अलबम "द लिविंग रूम सेशंस"के लिए ग्रैमी के लिए नॉमिनेट किया गया था.

बीटल्स के साथ

पंडित रविशंकर को भारतीय संगीत को पश्चिमी दुनिया में लोकप्रिय करने का श्रेय जाता है. उन्होंने मशहूर वायलिनवादक यहूदी मेनुहिन और बीटल्स के साथ 60 के दशक में सहयोग कर भारतीय संगीत को नई परिभाषा दी. मेनुहिन के साथ उनकी रचना "वेस्ट मीट्स इस्ट" को ग्रैमी से नवाजा गया. उनकी प्रेरणा से जॉर्ज हैरिसन ने सितार सीखा और 1965 में नॉर्वेजियन वुड तथा 1967 में "विदिन यू, विदाउट यू" जैसे गाने रिकॉर्ड किए. हैरिसन के साथ दोस्ती के कारण वे मोन्टेरी और वुडस्टॉक पॉप संगीत महोत्सवों में शामिल हुए. इसके साथ ही वे पश्चिम में घरेलू नाम बन गए.

पंडित रविशंकर 1986 से 1992 तक राज्य सभा के मनोनीत सदस्य रहे. उनके संगीत सफर के लिए 1999 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया. उन्हें 14 मानद डॉक्ट्रेट, पद्म विभूषण, मेगसायसाय पुरस्कार, तीन ग्रेमी अवॉर्ड और 1982 में गांधी फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ मौलिक संगीत के लिए जॉर्ज फेन्टन के साथ नामांकन मिला.

पंडित रविशंकर का जन्म 1920 में उत्तरप्रदेश के वाराणसी में हुआ था. उनका परिवार पूर्वी बंगाल के जैस्सोर जिले के नरैल का रहने वाला था.

रिपोर्ट: महेश झा (रॉयटर्स, पीटीआई)

संपादन: ईशा भाटिया

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