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मनोरंजन

नहीं रहे सुरों के बादशाह

हिन्दी फिल्म संगीत को नई उंचाइयों पर पहुंचाने वाले मन्ना डे का 94 साल की उम्र में निधन हो गया. उनके देहांत पर फिल्म और संगीत जगत में शोक छा गया है.

भारतीय सिनेमा जगत के महान गायक मन्ना डे का गुरुवार तड़के बंगलोर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. डे 94 साल के थे और लंबे समय से बीमार थे. मन्ना डे को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद पांच महीने पहले नारायणा हृदयालय अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि गुरुवार सुबह 3.50 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली. मन्ना डे के परिवार का कहना है कि उनके आखिरी वक्त में बेटी शुमिता देब और दामाद ज्ञानरंजन देब साथ ही थे. डे की दो बेटियां हैं जिनमें से एक अमेरिका में रहती है. डे के दामाद ज्ञानरंजन देब ने कहा, ''हमें उनके निधन का दुख है. अंतिम समय में उन्हें कोई तकलीफ नहीं हुई.'' कोलकाता में साल 1919 में जन्मे मन्ना डे ने मुंबई में 50 साल से अधिक समय बिताया था. प्रतिष्ठित दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित मन्ना डे पिछले कई सालों से बंगलोर में रह रहे थे.

Manna Dey FLASH Galerie

मन्ना को गायकी के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया

साढ़े तीन हजार से अधिक गीत गाए

श्रोताओं को हिन्दी और बांग्ला समेत अनेक भाषाओं में 3,500 से अधिक गीतों की सौगात देने वाले मन्ना डे की आवाज कई पीढ़ियों की पसंदीदा रही. उन्होंने न केवल रागों पर आधारित गीत गाए, बल्कि कव्वाली और तेज संगीत वाले गीतों को भी अपनी आवाज से सजाया. उनके मशहूर गीतों में, पूछो ना कैसे मैंने (मेरी सूरत तेरी कहानी), ऐ मेरी जोहरा जबीं (वक्त), जिंदगी कैसी है पहेली (आनंद), यह दोस्ती (शोले), चतुर नार (पड़ोसन) और लागा चुनरी में दाग (दिल ही तो है) शामिल हैं. प्रबोध चन्द्र डे उर्फ मन्ना डे का जन्म एक मई 1919 को कोलकाता में हुआ था. डे के पिता उन्हें वकील बनाना चाहते थे, लेकिन उनका रुझान संगीत की ओर था और वह इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते थे.

कई अवॉर्ड से सम्मानित

डे ने संगीत की शुरुआती शिक्षा अपने चाचा केसी डे से हासिल की. जाने माने गायक और अभिनेता केसी डे ने उन्हें मन्ना का उपनाम दिया. कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद मन्ना डे मुंबई चले गए. साल 1943 में फिल्म तमन्ना में बतौर गायक उन्हें सुरैया के साथ गाने का मौका मिला. सात साल के बाद फिल्म मशाल में गाया गाना काफी लोकप्रिय हुआ. उनकी आखिरी रिकॉर्डिंग साल 2006 में फिल्म उम्र के लिए हुई. भारतीय शास्त्रीय संगीत के बहुमुखी गायक डे ने नए जमाने के गानों को भी बिना किसी हिचक के गाया. उन्होंने हिन्दी के अलावा बंगाली, मराठी, गुजराती, मलयालम, कन्नड़ और असमिया भाषा में भी गीत गाए. डे को फिल्मों में उल्लेखनीय योगदान के लिए साल 1971 में पद्मश्री पुरस्कार और साल 2005 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया. मन्ना डे के निधन पर फिल्म और संगीत के जगत के लोगों के अलावा सभी वर्गों के नेताओं ने श्रद्धांजलि दी है.

एए/एनआर (पीटीआई)

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