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जर्मन चुनाव

नहीं रहे रिचर्ड होलब्रुक

बोस्नियाई युद्ध के खात्मे के लिए समझौता कराने वाले अमेरिकी राजनयिक रिचर्ड होलब्रुक का निधन हो गया है. इन दिनों वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लिए विशेष अमेरिकी दूत की जिम्मेदारी संभाल रहे थे.

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अमेरिका ने खोया उत्कृष्ट राजनयिकः क्लिंटन

69 वर्षीय होलब्रुक के पांच दशक लंबे करियर में दक्षिणी वियतनाम में जूनियर राजनयिक से लेकर संयुक्त राष्ट्र और जर्मनी में अमेरिकी राजूदत जैसी अहम जिम्मेदारियां शामिल रहीं. वह दो बार अमेरिकी विदेश उप मंत्री भी रहे.

शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन से मुलाकात के बाद होलब्रुक की तबीयत खराब हो गई. उन्हें वॉशिंगटन के अस्पातल में भर्ती कराया गया. दिल से शरीर के अन्य हिस्सों तक रक्त पहुंचाने वाली मुख्य धमनी में अवरोध को दूर करने के लिए उनका ऑपरेशन किया गया.

क्लिंटन ने एक बयान में कहा, "रिचर्ड होलब्रुक ने पचास साल तक उस देश की सेवा की जिसे वह प्यार करते थे. संयुक्त राष्ट्र में उसका प्रतिनिधित्व किया. युद्ध से जूझ रहे इलाकों में शांति समझौते कराए. वह एक उत्कृष्ट राजनयिक थे. वह मुश्किल हालात में भी अमेरिकी हितों के लिए खड़े रहे हैं."

1995 में बोस्नियाई युद्ध को खत्म कराने के लिए जब होलब्रुक ने डेटन समझौता कराया तो उन्हें बुल्डोजर का नाम दिया गया. वह सात बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामांकित हुए. होलब्रुक जनवरी 2009 से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लिए अमेरिकी विशेष दूत की जिम्मेदारी संभाल रहे थे जो अमेरिकी सरकार की सबसे मुश्किल चुनौतियों में से एक है. वह नौ साल से युद्ध झेल रहे अफगानिस्तान में अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा की रणनीति को लागू करने में अहम भूमिका अदा कर रहे थे.

क्लिंटन ने एक भावुक बयान में कहा, "यह मेरे लिए, अमेरिकी विदेश विभाग और अमेरिका के लिए बहुत दुख का दिन है. असल मायनों में रिचर्ड आखिरी वक्त तक योद्धा बने रहे. डॉक्टर उनकी ताकत और इच्छा शक्ति के कायल थे लेकिन उनके दोस्तों के लिए यही तो रिचर्ड की पहचान है. आज की रात अमेरिका ने अपने तेज तर्रार पैरोकारों और सबसे समर्पित सेवकों में से एक को खो दिया है."

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एस गौड़

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