नहीं रहे नेल्सन मंडेला | दुनिया | DW | 05.12.2013
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दुनिया

नहीं रहे नेल्सन मंडेला

नस्लवाद के खिलाफ जंग के मसीहा और दक्षिण अफ्रीका के महान अश्वेत नेता नेल्सन मंडेला का निधन हो गया. वह 95 साल के थे. उन्होंने जोहानिसबर्ग के अपने घर पर आखिरी सांस ली.

मंडेला के निधन के बाद पूरी दुनिया में शोक की लहर छा गई है. दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जूमा ने इस बात का एलान करते हुए कहा, "प्यारे देशवासियो, हमारे प्यारे नेल्सन रोहलिल्हा मंडेला, हमारे लोकतांत्रिक देश के संस्थापक गुजर गए हैं."

जूमा ने कहा कि मंडेला अब शांति में सो रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी मंडेला की मौत पर गहरा दुख जाहिर किया है.

मंडेला 1994 में दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति चुने गए. उन्होंने राष्ट्रपति के तौर पर एक कार्यकाल पूरा किया और इसके बाद पद छोड़ दिया. उन्हें इस साल फेफड़े में इंफेक्शन की शिकायत के बाद अस्पताल में दाखिल किया गया. हालांकि सितंबर में उन्हें छुट्टी दे दी गई. इसके बाद से वह अपने घर में ही थे, जहां उनकी गहन देख भाल की जा रही थी.
देश की राजधानी प्रीटोरिया में मंडेल के निधन की खबर देते हुए राष्ट्रपति जूमा ने कहा, "स्वतंत्रता के लिए उनकी अथक मेहनत और उनकी इंसानियत ने उन्हें इतना प्यार दिया." जूमा का यह बयान देश के सभी टेलीविजन चैनलों पर प्रसारित किया गया. राष्ट्रपति ने कहा, "निश्चित तौर पर यह हमारे लिए सबसे बड़ी दुख की घड़ी है." जूमा ने बार बार मंडेला को प्यार के नाम मदीबा कह कर पुकारा.
उन्होंने कहा, "हमारे देश ने अपना सबसे महान बेटा खो दिया." श्वेत राज में मंडेला को 27 साल तक जेल में रहना पड़ा. इनमें वे साल भी थे, जब उनसे कड़ी मेहनत कराई गई. मंडेला ने बार बार कहा कि उनका संघर्ष एक स्वतंत्र दक्षिण अफ्रीका के लिए था, जहां रंगभेद की कोई जगह न हो.
मंडेला के परिवार में उनकी पत्नी ग्रासा मशाल, उनकी पूर्व पत्नी विनी मदीकिजेला मंडेला, बच्चे, नाती पोते और पड़पोते हैं. जूमा ने आखिर में कहा, "प्यारे दक्षिण अफ्रीकियो, नेल्सन मंडेला ने हमें साथ लाया, और अब हमें साथ में ही उन्हें विदा करना है."

एजेए/आईबी (एएफपी, रॉयटर्स)