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मनोरंजन

नहीं रहे दिग्गज हास्य कलाकर देवेन वर्मा

हिन्दी सिनेमा के दिग्गज हास्य कलाकार और निर्माता-निर्देशक देवेन वर्मा का दिल का दौरा पड़ने और गुर्दा खराब होने के कारण मंगलवार निधन हो गया. देवेन 77 वर्ष के थे.

पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि उन्होंने मंगलवार तड़के अंतिम सांस ली. उनके परिवार में उनकी पत्नी रूपा गांगुली हैं. गांगुली बीते जमाने के जाने माने अभिनेता अशोक कुमार की छोटी बेटी हैं. देवेन वर्मा का गृहनगर पुणे था जहां से उन्होंने राजनीति और समाजशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की.

हिन्दी फिल्म जगत में देवेन वर्मा का नाम एक ऐसी शख्सियत के तौर पर लिया जाता है जिन्होंने न सिर्फ अभिनय प्रतिभा से बल्कि फिल्म निर्माण और निर्देशन से भी दर्शकों को अपना दीवाना बनाया. पुणे से स्नातक की पढ़ाई के बाद साठ के दशक में अभिनेता बनने का सपना लेकर वह मुंबई आ गए.

फिल्मी सफर

उन्होंने अपने करियर की शुरूआत 1961 में यश चोपड़ा निर्देशित फिल्म धर्म पुत्र से की. बहुत कम लोगों को पता होगा कि इस फिल्म से ही अभिनेता शशि कपूर ने अपने सिने करियर की शुरूआत की थी. फिल्म टिकट खिड़की पर कामयाब तो हुई लेकिन देवेन वर्मा दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में असफल रहे. 1963 में देवेन वर्मा को बीआर चोपड़ा की फिल्म गुमराह में काम करने का अवसर मिला लेकिन इससे भी उन्हें कोई खास फायदा नहीं पहुंचा.

1966 देवेन वर्मा के सिने करियर के लिए अहम साल साबित हुआ. इस साल उनकी देवर, बहारें फिर भी आएंगी और अनुपमा जैसी फिल्में रिलीज हुईं. इन फिल्मों में उनके अभिनय के विविध रूप देखने को मिले. इन फिल्मों की सफलता के साथ ही देवेन वर्मा दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गए.

देवेन हास्य चरित्रों के लिए कई दिग्गज निर्माता-निर्देशकों की पहली पसंद थे जिनमें बासु चटर्जी, हृषिकेश मुखर्जी और गुलजार जैसे नाम शामिल हैं. उन्होंने हिन्दी के अलावा कुछ मराठी और भोजपुरी फिल्मों में भी काम किया. वह आखिरी बार बड़े पर्दे पर 2013 में कलकत्ता मेल में नजर आए थे.

एए/एसएफ (वार्ता)

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