1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

जर्मन चुनाव

नहीं मिली दारा सिंह को मौत की सजा

उड़ीसा में ऑस्ट्रेलियन मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो बच्चों को जिंदा जला देने वाला दारा सिंह सुप्रीम कोर्ट में भी मौत की सजा से बच गया है. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की सुनाई उम्र कैद की सजा को बरकरार रखा है.

default

1999 की जनवरी में दारा सिंह और उसके कुछ साथियों ने ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटों को उनकी कार में जिंदा जला दिया था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने शुक्रवार को फैसला सुनाया. जस्टिस पी सतसिवम और जस्टिस बीएस चौहान ने सरकार की मौत की सजा देने की अपील को ठुकरा दिया. उन्होंने कहा कि मौत की सजा "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" यानी विरले मामलों में ही दी जा सकती है.

Oberstes Gericht in Indien

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दोषियों ने जो अपराध किया है वह बहुत ज्यादा निंदनीय है लेकिन रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में नहीं आता. दारा सिंह और उसके साथी महेंद्र हेमब्रोम को उड़ीसा के क्योंझर जिले में एक चर्च के बाहर अपनी वैन में सोए पादरी और उनके बेटों को जलाकर मारने का दोषी पाया गया था. यह घटना 22 जनवरी 1999 की है.

इस बारे में कोर्ट ने सीबीआई के वकील और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विवेक तंखा और बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद 15 दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था. इस मामले में कुल 12 लोग आरोपी थे. उनके लिए वरिष्ठ वकील केटीएस तुलसी, रत्नाकर दाश और सिबो शंकर मिश्रा ने वकालत की.

तंखा ने कहा कि दारा सिंह मौत की सजा का हकदार है क्योंकि उसने पैशाचिक और कायरतापूर्ण कार्रवाई में तीन मासूमों की जान ले ली. लेकिन अदालत उनकी दलील से संतुष्ट नहीं हुई.

इस मामले में निचली अदालत ने दारा सिंह और उसके साथी महेंद्र को दोषी बताते हुए मौत की सजा सुनाई थी लेकिन उड़ीसा हाई कोर्ट ने 19 मई 2005 को उसे उम्र कैद में बदल दिया था. इस फैसले के खिलाफ दारा सिंह और सीबीआई दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील खारिज कर दी.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः एन रंजन