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विज्ञान

नहीं बिका करेगी खुली सिगरेट

भारत में सिगरेट की 70 फीसदी बिक्री खुले पैकेट से ही होती है. हर साल करीब दस लाख लोगों की मौत तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से होती है. ऐसे में खुली सिगरेट पर बैन को अच्छी पहल माना जा रहा है.

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा है कि सरकार ने विशेषज्ञ समिति के उस सुझाव को मान लिया है जिसमें खुली सिगरेट की बिक्री पर रोक लगाने की बात कही गई है. नड्डा ने कहा कि रोक लगाने से पहले इसे मंत्रिमंडल के सामने स्वीकृति के लिए रखा जाएगा.

इस खबर के आने के फौरन बाद ही सिगरेट कंपनियों के शेयर में गिरावट दर्ज की गयी. आईटीसी के शेयर 5.2 फीसदी गिरे. पिछले पांच महीने में यह कंपनी की सबसे भारी गिरावट है. वहीं गोडफ्रे फिलिप्स इंडिया लिमिटेड के शेयर नौ फीसदी गिरे हैं.

अमेरिकी कंपनी मॉर्गन स्टैनली ने कहा है कि सरकार का प्रस्ताव आईटीसी के खिलाफ एक कदम है. कंपनी ने साथ ही यह भी कहा है कि सरकार के लिए नए नियम को लागू करना आसान नहीं होगा. कंपनी ने सलाह दी है कि सिगरेट निर्माता छोटे पैकेट बनाने लगें ताकि बिक्री पर ज्यादा बुरा असर ना हो. भारत में कई सिगरेट कंपनियां पहले से ही छोटे पैकेट बेचती हैं.

देश में तंबाकू के कारण होने वाली बीमारियों से सालाना करीब दस लाख लोगों की जान जाती है. अंतरराष्ट्रीय टोबैको कंट्रोल प्रोजेक्ट के अनुसार 2020 तक यह आंकड़ा 15 लाख को पार कर सकता है. भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के फ्रेमवर्क कनवेंशन ऑन टोबैको कंट्रोल का हिस्सा है. इस कनवेंशन से जुड़े देश खुली सिगरेटों की बिक्री बंद करने पर बाध्य हैं. पैनल सिगरेट बिक्री के लिए उम्र बढ़ाने की भी पैरवी कर रहा है और कम उम्र के लोगों को सिगरेट बेचने पर सख्त सजा पर विचार कर रहा है.

मोदी सरकार ने हाल ही में तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाया है और सिगरेट के पैकेट के 85 फीसदी हिस्से पर उससे होने वाली बीमारी के चित्र लगाने के निर्देश भी जारी किए हैं.

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