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दुनिया

नहीं बनेंगी बोखुम में ओपेल कारें

कार निर्माता कंपनी ओपेल ने जर्मनी के बोखुम का कारखाना 2016 में बंद करने का फैसला लिया है. जर्मनी के वाणिज्य मंत्री ने ओपेल कारखाने को बंद करने के लिए अमेरिकी जेनरल मोटर्स की आलोचना की और जिम्मेदारी दिखाने की मांग की है.

सोमवार को कर्मचारियों की एक सभा में ओपेल प्रमुख थोमस जेडरान ने कार उत्पादन रोकने की घोषणा की, लेकिन वहां कल पुर्जे बनाना जारी रहेगा. इस समय बोखुम कारखाने में करीब 4000 लोग काम करते हैं. भविष्य में वहां कितनी नौकरियां बचेंगी, इसके बारे में कंपनी ने कुछ भी नहीं बताया है. ओपेल कार बनाना बंद करने के फैसले पर कर्मचारियों की तीखी प्रतिक्रिया हुई है. आर्थिक मुश्किलों में घिरे कारखाने को बचाने के लिए उन्होंने पिछले साल करोड़ों यूरो का योगदान दिया. उन्होंने पिछले साल वेतन वृद्धि और क्रिसमस बोनस नहीं लिया.

लेकिन कारखाने का बंद होना इतना अचंभे वाला भी नहीं था. अमेरिकी रेडियो स्टेशन कई दिनों से खबर दे रहे थे कि डेट्रॉयट में जनरल मोटर्स के मैनेजरों ने पहले ही बोखुम कारखाने को बंद करने का फैसला ले लिया था. अमेरिकी दैनिक न्यूयॉर्क टाइम्स ने खबर दी थी कि जनरल मोटर्स के अधिकारियों का कहना है कि बोखुम का कारखाना पुराना हो चला है. इसके अलावा कर्मचारियों की औसत आयु बहुत अधिक है जिसके कारण वे महंगे हैं. जनरल मोटर्स को इस साल यूरोप में 1.8 अरब डॉलर का नुकसान होने का अंदेशा है.

मैनेजमेंट की गलतियों का खामियाजा

बोखुम की मेयर ओटिली शोल्स ने ओपेल अधिकारियों के फैसले को "शहर और इलाके के लिए भारी क्षति" बताया है. वाणिज्य मंत्री फिलिप रोएसलर ने ओपेल से अपनी जिम्मेदारी पूरी करने की मांग की है. उन्होंने जनरल मोटर्स पर टकराव का आरोप लगाते हुए कहा है कि ओपेल को चीन जैसे बढ़ते बाजार से काट कर रखा गया. रुअर इलाके के वाणिज्य मंडल ने ओपेल के फैसले को बेतुका बताया है. बोखुम में फैमिली वैन जफीरा के साथ ओपेल अपना सबसे सफल मॉडेल बनाता है.

ओपेल कारखाने में कार का उत्पादन रोके जाने का फैसला बोखुम के रोजगार बाजार के लिए कुछ ही सालों के भीतर एक और गहरी चोट है. चार साल पहले 2008 में मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी नोकिया ने अपना कारखाना बंद कर दिया था. उसकी वजह से 2300 लोगों की नौकरी चली गई. उसकी भरपाई अभी तक नहीं हो पाई है.

सप्लायर कंपनियों का भी नुकसान

बोखुम का ओपेल कारखाना बंद होने से सिर्फ कार बनाने वाले कर्मचारियों का ही नुकसान नहीं हुआ है, उसका नुकसान कल पुर्जों की सप्लाय करने वाली कंपनियों पर भी होगा. उनमें जॉनसन कंट्रोल कंपनी भी शामिल है जो ओपेल की गाड़ियों के लिए सीटें बनाती है. रोजगार विशेषज्ञों का कहना है कि कारखाना बंद होने से सप्लायर कंपनियों में 3000 से ज्यादा रोजगार प्रभावित होंगे.

बोखुम कारखाने में कर्मचारी परिषद के प्रमुख राइनर आइनएंकेल की उम्मीदें टूटी नहीं हैं. वे कहते हैं, "हम उकसावे में नहीं आएंगे, अब हम इस बात पर बातचीत कर रहे हैं कि बोखुम कारखाने को बचाने के लिए कौन से कदम जरूरी हैं." उनका मानना है कि 2017 से बोखुम में जफीरा के बाद आने वाले मॉडेल और छोटी कार मोक्का का निर्माण हो सकता है. लेकिन आम कर्माचारी पिछले सालों के उतार चढ़ाव के बाद कार निर्माण जारी रहने का भरोसा खो बैठे हैं.

निराश ओपेल कर्मी

ओपेल अधिकारियों की कार का उत्पादन बंद करने की घोषणा के बाद अब होने वाली बातचीत का लक्ष्य कारखाने के कुछ ही रोजगार को बचाना होगा. बोखुम कारखाने के अंतरिम प्रमुख थॉमस जेडरान के अनुसार केंद्र में डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर है जहां इस समय 430 कर्मचारी काम कर रहे हैं. वे उनकी संख्या बढ़ाए जाने को संभव मानते हैं. इसके अलावा इंजन और गीयर बॉक्स बनाना जारी रखने की भी संभावना है. इसमें भी कुछ सौ लोगों को काम मिल सकता है.

अधिकारियों के अनुसार ओपेल कर्मचारियों की छंटनी नहीं करेगा. मैनेजमेंट कर्मचारियों को ओपेल के दूसरे कारखानों में नौकरी की पेशकश करेगा. लेकिन कर्मचारी बोखुम छोड़कर रुसेल्सहाइम या आइजेनाख जाना चाहेंगे, इसमें संदेह है. इस समय भी कर्मचारियों की कटौती के सिलसिले में यह पेशकश की गई है, लेकिन बहुत कम लोगों ने इसका फायदा उठाया है. अगले शनिवार को बोखुम में कारखाने की 50वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है, लेकिन उसे बंद किए जाने के फैसले के बाद माहौल गमगीन है.

रिपोर्ट: क्लाउस डौएजे/एमजे

संपादन: आभा मोंढे

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