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दुनिया

नहीं खत्म होगा तमिल राष्ट्रगान

श्रीलंका सरकार ने तमिल राष्ट्रगान को खत्म करने की बात से इनकार किया है. देश में इस फैसले के खिलाफ हुए कड़े विरोध के बाद सरकार अपने कदम से पीछे हट गई है.

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लोक प्रशासन मंत्री जॉन सेनेविरातन ने कहा कि यथास्थिति बनी रहेगी. लोक प्रशासन मंत्रालय ही राष्ट्र गान के बारे में फैसलों के लिए जिम्मेदार है.

कोलंबो से छपने वाले श्रीलंका के अखबार द संडे टाइम्स ने पिछले हफ्ते खबर दी थी कि राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने तमिल राष्ट्रगान को खत्म करने का फैसला लिया है. राजपक्षे का कहना था कि देश में दो राष्ट्रगान होने का कोई मतलब नहीं है इसलिए सिर्फ सिंहली राष्ट्र गान को ही राष्ट्र गान माना जाएगा और सरकारी कार्यक्रमों में उसी का इस्तेमाल किया जाएगा.

संडे टाइम्स अखबार के मुताबिक यह फैसला कैबिनेट की बैठक में लिया गया था. हालांकि दो मंत्रियों ने इसका विरोध किया था लेकिन अखबार का कहना था कि फैसला ले लिया गया है और जल्दी ही लोक प्रशासन मंत्रालय को इसकी सूचना भेज दी जाएगी. लोक प्रशासन मंत्री ने अब कहा है कि ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है. उन्होंने कहा, "राष्ट्र गान के बारे में बदलाव का कोई फैसला नहीं हुआ है और हम उसी तरह काम करते रहेंगे जैसे पहले करते थे."

सरकार के इस फैसले का देशभर में विरोध हुआ. मुख्य तमिल पार्टी तमिल नेशनल अलायंस ने कहा कि उनसे इस बारे में सरकार से सफाई मांगी थी. पार्टी के सांसद सुरेश प्रेमाचंद्रन ने कहा, "जब सरकार नस्ली समभाव और राष्ट्रीय एकता की बात कर रही है, ऐसे वक्त में राष्ट्र गान का मुद्दा उठाना गैरजरूरी है. अगर हम तमिल में राष्ट्रगान नहीं गा सकते तो हम राष्ट्र गान के बहिष्कार के लिए मजबूर होंगे."

कट्टर राष्ट्रवादी नेता विमल वीरवांसा कहते हैं, "सिर्फ श्रीलंका में आपको दूसरी भाषा में अनुवाद किया हुआ राष्ट्रगान मिलेगा. यह एक मजाक है. सरकार एक ऐसी गलत परंपरा को ठीक करने की कोशिश कर रही है जो 1978 से चली आ रही है."

तमिल विद्रोहियों ने देश में 40 साल तक आजादी के नाम पर खूनी जंग लड़ी. वे लोगों का समर्थन जीतने के लिए भाषाई भेदभाव जैसे मुद्दों का ही इस्तेमाल करते थे.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः आभा एम

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