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दुनिया

नवजात शिशुओं की जान पर बनी

भारत के ओडीशा प्रांत में हुए एक रिसर्च में इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि इन जगहों पर शौचालय की कमी के कारण फैली गंदगी का गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है.

शोध में पाया गया कि इससे नवजात शिशुओं के जन्म से जुड़ी कई तरह की समस्याएं बढ़ रही हैं. गर्भवती महिला की देखभाल में सफाई के महत्व को सामने लाने वाली रिसर्च पीएलओएस नामक जर्नल में प्रकाशित हुई है. इस स्टडी में बताया गया है कि साफ सफाई की कमी, खुले में शौच और ऐसी ही कुछ आदतों के कारण गर्भवती महिलाओं में समय से पहले बच्चे के जन्म के मामलों में असर पड़ा.

ओडीशा के दो ग्रामीण इलाकों में भुवनेश्वर के एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ के रिसर्चरों ने सैकड़ों गर्भवती महिलाओं पर गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर बच्चे के जन्म तक नजर रखी. उनसे संबंधित तमाम आंकड़े इकट्ठे किए गए जिनमें उनकी शौच से जुड़ी आदतें, शौचालय की उपलब्धता जैसी जानकारियां भी शामिल थीं.

इन महिलाओं की तुलना एक ऐसे महिला समूह से की गई जो नियमित शौचालय का इस्तेमाल करती थीं. तुलनात्मक अध्ययन ने दिखाया कि खुले में शौच करने वाली महिलाओं में गर्भावस्था में परेशानी आने और समय पूरा होने से पहले बच्चे का जन्म होने का खतरा लैट्रिन इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की अपेक्षा कहीं अधिक था.

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में इस स्टडी की वरिष्ठ लेखिका पिनाकी पाणिग्रही ने बताया, "इससे संकेत मिलता है कि मां और बच्चे की सेहत के विषय में सैनिटेशन का एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू है. यह सामाजिक वर्ग और जाति से भी अलग मामला है."

साफ सफाई की कमी से गर्भवस्था के दौरान संक्रमण और तनाव का भी खतरा बढ़ता है. शोधपत्र में साफ लिखा है कि जन्म से जुड़ी जटिलताओं के कारकों के विषय पर और बड़े स्तर पर रिसर्च करने की जरूरत है. प्रारंभिक तौर पर गर्भवती महिला के व्यक्तिगत हाइजीन और स्वस्थ गर्भवस्था के बीच सीधा संबंध स्थापित हुआ है.

आरआर/एमजे

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