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विज्ञान

नया उपग्रह​ करेगा ग्लोबल वार्मिंग की निगरानी

अरबों यूरो के कॉपर्निकस प्रोजेक्ट के तहत एक और नया उपग्रह सेंटिनेल-3ए अंतरिक्ष में छोड़ा गया है जो जलवायु परिवर्तन पर नजर रखेगा. महज दो दिनों में ये भेज सकता है पूरी पृथ्वी की तस्वीर.

यूरोप ने अरबों यूरो की कॉपर्निकस पृथ्वी अवलोकन परियोजना के तहत एक उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा है. ये उपग्रह अल नीनो जैसी मौसम से जुड़ी घटनाओं का अनुमान लगाने और बढ़ते जलवायु परिवर्तन पर नजर रखने में मदद करेगा.

सेंटिनेल-3ए नाम का ये उपग्रह, उपग्रहों के उस तंत्र का ही एक हिस्सा है जो कि पृथ्वी की निगरानी कर रहे हैं. सेंटिनेल-3ए को रूस के उत्तर-पश्चिमी आर्कान्जेस्क इलाके के प्लेस्टेस्क कॉस्मोड्रोम से मंगलवार 12:57 (1757 जीएमटी) पर रॉकेट लॉन्चर की मदद से छोड़ा गया. इस उपग्रह की कक्षा पृथ्वी से 815 किमी ऊंचाई पर निर्धारित की है जहां से ये समुद्र की सतह के तापमान और ऊंचाई के आंकड़े दर्ज करेगा. ये आंकड़े मौसम और बढ़ते तापमान की भविष्यवाणियों को और अधिक सटीक बता पाने में मदद करेंगे.

Illustration Start des Erdbeobachtungssatelliten Sentinel-3A

पृथ्वी की तरफ झांकता सेंटिनेल-3

यूरोपीय स्पेस एजेंसी के निदेशक फोल्कर लीबिष ने इस प्रक्षेपण के बारे में कहा, ''जब हम जलवायु परिवर्तन की बात करते हैं तो अक्सर हम हवा के बढ़ रहे तापमान की बात कर रहे होते हैं, लेकिन हमारे ग्रह में उठने वाली 90 प्रतिशत ऊर्जा समुद्र में समा जाती है.'' 2017 के मध्य में एक और उपग्रह भेजा जाना है. उस उपग्रह के साथ मिलकर सेंटिनेल-3ए से मिलने वाले आंकड़े​ शिपिंग कंपनियों के लिए सबसे सटीक रूट चार्ट भी बना पाएंगे. ये आंकडे जंगलों में लगने वाली आग, तेल के रिसाव और फसलों के पूर्वानुमान का भी पर्यवेक्षण कर पाएंगे.

यूरोपीय संघ और यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) सन 2020 तक कॉपर्निकस प्रोजेक्ट के लिए 8 अरब यूरो (9 अरब डॉलर) से अधिक पैसा मुहैया कराने पर सहमत हुए हैं. ईएसए के मुताबिक ये परियोजना पृथ्वी की निगरानी के लिए अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी योजना है.

यूरोप के लिए कॉपर्निकस परियोजना को लॉन्च करना खासकर तब बहुत जरूरी हो गया था जब 2012 में उसकी अर्थ ऑब्जर्वेशन सेटेलाइट एनवीसेट से 10 साल बाद उसका संपर्क टूट गया था.

सेंटिनेल-3ए द्वारा ली गई त​स्वीरें कॉपर्निकस परियोजना के तहत इससे पहले भेजे गए उपग्रहों, सेटिनेल-1ए और सेंटिनेल-2ए के मुकाबले कम रिजोल्यूशन की हैं. लेकिन 3ए पृ​थ्वी की विस्तृत सतह को कवर करेगा.

ये लगभग दो दिनों में पूरे ग्रह की समग्र तस्वीर भेज सकता है. अगले साल भेजे जाने वाले अपने सहयोगी उपग्रह 3बी के साथ मिलकर ये इस काम को एक दिन से भी कम समय में कर लेगा. ईएसए के लीविष कहते हैं सेंटिनेल-1 और सेंटिनेल-2 उपग्रह दोनों मिलकर ये करने में लगभग 6 दिन लगाते हैं.

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