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ताना बाना

नक्सली नेता की मौत के 40 साल बाद आएगा फैसला

सीबीआई की विशेष अदालत 40 साल पहले हुए एक नक्सली नेता की मौत के मामले में 27 अक्टूबर को फैसला सुनाएगी. इसी साल अप्रैल में शुरू हुए केस की सुनवाई में अब तक 31 गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं.

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18 फरवरी 1970 को केरल के वयनाड जिले के तिरुनेली जंगलों में नक्सली नेता पुलिस की गोलीबारी में मारा गया. वर्गीज के दो भाइयों और उसके एक पड़ोसी ने पुलिस को हथकड़ी लगाकर वर्गीज को ले जाते देखा. इन तीनों ने भी सीबीआई के सामने अपनी गवाही दी है. वर्गीज के भाई थॉमस ने कोर्ट को बताया कि घटना वाले दिन कुछ पुलिसवाले उनके घर आए और कहा कि उनका भाई पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया है.

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थॉमस ने अपने घर के अहाते में दफनाए गए वर्गीज के शव की पहचान भी की. चर्च की कब्रगाह में थॉमस को दफनाने की इजाजत नहीं मिलने के बाद उसे घर के अहाते में दफनाया गया. वर्गीज के परिवारवालों ने तब के मुख्यमंत्री सी अच्युता मेनन से भी उसकी मौत की जांच कराने की मांग की पर कुछ नहीं हुआ.

कुछ साल पहले सीआरपीएफ के एक कांस्टेबल रामचंद्रन ने कहा कि उसने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के आदेश पर वर्गीज को गोली मारी थी. रामचंद्रन को ऐसा करने के लिए पुलिस सुपरिटेंडेंट विजयन और डीएसपी लक्ष्मणन ने कहा. रामचंद्रन के इस बयान के बाद ये मामला मीडिया की सुर्खियों में छा गया. वर्गीज के भाई और कुछ पूर्व नक्सलियों ने केरल हाईकोर्ट में सीबीआई से जांच कराने की याचिका दायर की.

1999 में हाईकोर्ट ने सीबीआई को वर्गीज की मौत की जांच करने का आदेश दिया. इसके बाद सीबीआई ने कास्टेबल रामचंद्रन, पूर्व डीआईजी पी विजयन,और पूर्व आईजी के लक्ष्मणन के खिलाफ चार्जशीट दायर की.

मामले के पहले आरोपी रामचंद्रन नायर की 2006 में मोत हो गई. मौत से पहले रामचंद्रन ने कहा कि वो अपनी अंतरात्मा की आवाज पर सारे गुनाह कबूल करता है.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः एमजी