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ताना बाना

नक्सलवाद के ख़ात्मे के लिए तुरंत कार्रवाई हो-प्रधानमंत्री

नक्सलवादी हमलों के संदर्भ में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक बार फिर कहा है कि इस समस्या से निपटने के लिए तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए. बुधवार तड़के दंतेवाड़ा में जवानों पर फिर नक्सलियों ने हमला किया.

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भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ज़ोर देकर कहा है कि जो भी भारतीय सरकार को उखाड़ फेंकने की चुनौती दे रहे हैं उन्हें बिलकुल माफ़ नहीं किया जा सकता. नक्सलवाद को आतंरिक सुरक्षा के लिए ख़तरा बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "हाल की घटनाओं से इस बात की ज़रूरत बढ़ी है कि नक्सलवाद की समस्या ख़त्म करने के लिए तुरंत कार्रवाई की जाए."

प्रधानमंत्री ने ज़ोर दिया, "ऐसे लोगों को बिलकुल माफ़ नहीं किया जा सकता जिन्होंने देश की सरकार को चुनौती देने का निर्णय लिया हो." सिविल सर्विस डे के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा, "हम इस तथ्य को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते जहां नक्सलवाद फलफूल रहा है, ये इलाके विकास की दौड़ में पीछ रह गए हैं और यहां रहने वाले लोग अधिकतर ग़रीब आदिवासी हैं जिन्होंने विकास नहीं देखा है. इसलिए ये सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि देश में ऐसा कोई इलाका न हो जिन्हें हमारे महत्वाकांक्षी विकास लक्ष्यों का लाभ न मिल सके."

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन्फरमेशन टेकनॉलॉजी से ऐसे नए तरीके विकसित किए जाने चाहिए जिनसे भ्रष्टाचार, पारदर्शिता की कमी जैसी समस्याओं का पर्दाफ़ाश हो सके.

हालांकि भारत की स्वतंत्रता से अब तक कई राज्य हैं जहां सरकार ने कभी ध्यान नहीं दिया. या तो उनका दोहन होता रहा या फिर उन्हें बिलकुल अलग-थलग छोड़ दिया गया. 2010 में प्रधानमंत्री का कहना है,"तेज़ी से विकास का कोई मतलब नहीं है जब तक सामाजिक और आर्थिक असमानताएं मौजूद हैं और इन्हें तेज़ी से प्रभावशाली ढंग से ख़त्म नहीं किया जा रहा."

Indien Maoisten Anschlag

फिर हमला

नक्सलियों से बातचीत, उन पर कार्रवाई के बयानों को बीच बुधवार तड़के नक्सलवादियों ने फिर छत्तीगढ़ के दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ़ के जवानों के शिविरों पर हमला किया. महीने भर के भीतर नक्सलियों ने दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ पर दूसरा बड़ा हमला किया है. बताया जा रहा है कि माओवादियों ने अर्धसैनिक बलों के चार कैंपों को घेर कर फायरिंग शुरू कर दी. दंत्तेवाड़ा से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच देर रात तक फायरिंग होती रही.

हाल में ही सीआरपीएफ के 76 जवानों की हत्या करने के बाद माओवादियों ने मंगवार शाम क़रीब साढ़े सात बजे के आस पास जवानों के कैंपों पर हमला किया. हमलावर 400 से ज़्यादा बताए जा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक नक्सलियों ने कांकेरलंका, पोलमपल्ली, ऐराबोर, चिंतागुफ़ा और भेज्जी के जंगलों में यह हमला किया. इन इलाकों को नक्सलियों का गढ़ माना जाता है.

अब तक घायलों और मृतकों की संख्या का पता नहीं चला है. सूत्रों ने आशंका ज़ाहिर की है कि इस हमले में भी दोनों पक्षों का ख़ासा नुक़सान होगा. सही स्थिति का पता बुधवार दोपहर तक ही लग सकेगा.

रिपोर्टः एजेंसिंयां/आभा मोंढे

संपादनः एम गोपालकृष्णन

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