नकली हाथों से भी महसूस होगा स्पर्श | विज्ञान | DW | 24.03.2017
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विज्ञान

नकली हाथों से भी महसूस होगा स्पर्श

भविष्य में नकली हाथ पैरों का इस्तेमाल करने वालों को त्वचा के माध्यम से स्पर्श भी महसूस हो, इसके लिेए वैज्ञानिकों ने मौजूदा सिंथेटिक इलेक्ट्रॉनिक त्वचा में ऊर्जा के सुचालक ग्रैफीन डाल कर नयी तरह की त्वचा विकसित की है.

अब तक केवल वैज्ञानिक शोधों और प्रयोगों में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रानिक (सिंथेटिक) त्वचा में अब सौर ऊर्जा के जरिये ऊर्जा पहुंचायी जा सकेगी. रिसर्चरों को उम्मीद है कि इसके बाद कृत्रिम अंग और रोबोट भी स्पर्श को महसूस कर सकेंगे. दुनिया भर में वैज्ञानिक सिंथेटिक त्वचा के लचीले संस्करण विकसित करने के लिये काम कर रहे हैं. इनका मकसद उसे भी मानव त्वचा की संवेदनाओं को महसूस करने लायक बनाना है.

इस तरह के सिस्टम में ऊर्जा का संचार करना सबसे बड़ी चुनौती रहा है. अब स्कॉटलैंड की ग्लासगो युनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के रिसर्चरों ने त्वचा में फिट करने लायक ग्रैफीन तैयार किया है. सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली पैदा करने में सक्षम ग्रैफीन, कार्बन के सबसे पतले स्वरूप का इस्तेमाल कर बनाया गया है. 

वैज्ञानिकों के मुताबिक ये ग्रैफीन मोटाई में एक अणु (एटम) के बराबर है, साथ ही इसका लचीला और पारदर्शी स्वरूप सौर ऊर्जा को एकत्रित कर बिजली पैदा करने के लिेये अनुकूल है. दुनिया में उपलब्ध स्मार्ट कृत्रिम हाथ कई तरह के कामों को कर पा रहे हैं, लेकिन त्वचा पर स्पर्श महसूस कराना अब तक संभव नहीं हो पाया है. अब कृत्रिम हाथों पर ऐसी महसूस कर सकने वाली त्वचा को लगाने से इन्हें इस्तेमाल करने वालों के लिये और भी उपयोगी बनाया जा सकेगा.

रोबोटों की कार्यक्षमता में इजाफा करने के लिये उनमें भी संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक त्वचा का उपयोग किया जा सकता है. रिसर्चर रवींद्र दहिया और उनकी टीम ने साइंस पत्रिका एडवांस फंक्शनल मटीरियल्स में बताया है कि कैसे उन्होंने विद्युत-उत्पादन वाले फोटोवॉल्टिक कोशिकाओं को जोड़ा. दहिया ने बताया कि टीम का अगला लक्ष्य कृत्रिम हाथ में लगी मोटर में इसी ऊर्जा का प्रयोग करना है.

एए/आरपी (रॉयटर्स)

 

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