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दुनिया

"नई पीढ़ी संभाले साइंस का नेतृत्व"

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि अब वक्त आ गया है कि वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी विज्ञान जगत में नेतृत्व संभाले और भारत में विज्ञान जगत के भविष्य के बारे में सोचे.

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बुधवार को भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि नौजवान वैज्ञानिकों को भारतीय विज्ञान जगत को आगे बढ़ाने के लिए आगे आना होगा. मनमोहन सिंह ने युवा वैज्ञानिकों को शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार भी दिए.

इस मौके पर 20 वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया. 2010 के लिए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बैंगलोर के जीके अनंतसुरेश, जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर अडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च, बैंगलोर के स्वप्न के पति और उमेश वासुदेव वागमारे शामिल हैं. टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई की शुभा तोले और कालोबरन मैती को भी पुरस्कार दिया गया.

समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा, "मुझे बड़ी शिद्दत से ऐसा लगता है कि अब बीते वक्त को पीछे छोड़ देना होगा. काम करने के लिए हमें नई व्यवस्था, नया ढांचा और नए तरीके ईजाद करने होंगे. हमें ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी जिससे न केवल हर व्यक्ति को आगे बढ़ने के समुचित मौके मिलें बल्कि उनकी प्रतिभा का इस्तेमाल समाज के लिए ज्यादा से ज्यादा उपयोगी साबित हो."

प्रधानमंत्री ने माना कि सरकार के सामने ऐसा करने की चुनौती काफी अहम है. उन्होंने कहा, "सरकार के सामने तो यह एक बड़ी चुनौती है ही लेकिन खासतौर पर वैज्ञानिकों को इस बारे में सोचना होगा. आगे बढ़ने के बारे में हमें साहस के साथ सोचना होगा."

मनमोहन सिंह ने कहा कि अगर वैज्ञानिक मिलकर इस सहमति पर पहुंच जाएं कि नई व्यवस्था क्या होगी और क्या किया जाना चाहिए तो सरकार के लिए उस दिशा में आगे बढ़ना आसान होगा और वह ज्यादा कुशलता से इस काम को कर पाएगी.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ओ सिंह

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