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दुनिया

नंगे और गंदगी में लिपटे मिले मानसिक रोगी

भारत के पश्चिम बंगाल में दर्जनों मानसिक रोगी नंगी अवस्था में गंदगी में लिपटे हुए बेहद दयनीय स्थिति में पाए गए. चैरिटी वर्कर ने लगाई इनकी स्थिति पर ध्यान देने की गुहार.

Indien Kolkata Psychiatrische Klinik

प्रतीकात्मक तस्वीर (कोलकाता के एक अन्य मानसिक रोग क्लीनिक से)

शरीर पर कीड़ों के काटने से फैला संक्रमण, तन पर कपड़े नहीं और गंदगी में लिपटे हुए - कोलकाता के सरकारी अस्पताल में मानसिक रोगियों की यह हालत है. राजधानी कोलकाता से करीब 50 किलोमीटर दूर बेहरामपुर में इस मेंटल हॉस्पिटल में बेहद बुरी स्थिति में रखे जा रहे कुपोषित मरीजों की तस्वीरें इसी हफ्ते सोशल मीडिया पर सामने आई हैं. एक सामाजिक कार्यकर्ता की पोस्ट की गई इन तस्वीरों ने भारत में मानसिक अस्पतालों की दर्दनाक हालत को एक बार फिर सबके सामने उजागर किया है.

अंजली मेंटल हेल्थ राइट्स नामकी चैरिटी संस्था के संस्थापक रत्नाबेली रे ने बताया कि उनके कार्यकर्ताओं के मानसिक अस्पताल के दौरों में मरीजों को नग्न हालत में जमीन पर सोते हुए पाया. इनके बिस्तर में कीड़े होने के कारण मरीज नग्न हालत में जमीन पर सोए थे. रे ने बताया, "तस्वीरें भी सच्चाई को ठीक से बयान नहीं कर सकतीं. वहां फैली बदबू बर्दाश्त से बाहर थी और सीधे तौर पर इंसान के रहने लायक नहीं थी."

चैरिटी संस्था कार्यकर्ता ने यह भी कहा कि "एक ही वॉर्ड में कम से कम 20 महिलाएं नंगी हालत में जमीन पर सोने को मजबूर थीं क्योंकि उनके बिस्तर के गद्दे-चादर में कीड़े थे." रे ने बताया कि अस्पताल में रहने वाले ज्यादातर मानसिक रोगी गरीब परिवारों से आते हैं.

बेहरामपुर मेंटल हॉस्पिटल में कई तरह की मानसिक बीमारियों से ग्रस्त करीब 400 वयस्क रहते हैं. रत्नाबेली रे ने बताया कि मरीज खुद भी कई बार साफ पानी, बाथरूम और ढंग के खाने के लिए शिकायतें कर चुके हैं. इस क्षेत्र की सक्रिय कार्यकर्ता होने के कारण खुद रे ने कई बार अस्पताल के अधिकारियों का इन हालात की ओर ध्यान खींचने की कोशिश की. लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया. इसी कारण उनकी संस्था ने वहां की तस्वीरें माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर डाल दीं.

दि लैंसेट और कई अन्य मेडिकल जर्नलों में प्रकाशित स्टडीज में बताया गया है कि भारत में मानसिक रोगियों का एक बहुत छोटा हिस्सा ही समुचित इलाज हासिल कर पाता है. इसके अलावा मानसिक रोगियों को भेदभाव और दुर्व्यवहार भी झेलना पड़ता है. कई अंधविश्वासी लोग तो मानसिक रोगों को पिछले जन्म के पापों की सजा समझते हैं. और अगर इसे बीमारी समझा भी जाए तो इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलती हैं.

इस अस्पताल की तस्वीरों के दुनिया के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल हेल्थ सर्विसेज के निदेशक बीआर सतपति ने कहा है कि वे मरीजों की मदद के लिए कुछ करेंगे. सतपति ने बताया कि वे इस मेंटल हॉस्पिटल में "स्थिति का आंकलन करने और जरूरी कदम उठाने के लिए एक टीम भेजेंगे."

मानसिक रोगों के अलावा भारत में करीब 15 लाख लोगों के डाउन्स सिंड्रोम या मिलती जुलती बौद्धिक अक्षमताओं के साथ जीने के आंकड़े दर्ज हैं, जिसे हेल्थ एक्सपर्ट बहुत कम बताते हैं. उन्हे लगता है कि भारत जैसी इतनी बड़ी आबादी वाले देश में इतनी कम संख्या का अर्थ यही हो सकता है कि आज भी कई मानसिक समस्याएं कभी पहचानी नहीं जातीं और इसीलिए उन्हें सही थेरेपी और इलाज भी नहीं मिलता.

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