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मंथन

धुलाई करो लेकिन टिकाऊ ढंग से

दुनिया भर में 38 फीसदी पानी कपड़े धोने के लिए इस्तेमाल होता है. धुलाई के बाद डिटरजेंट घुला यह पानी नदी नालों को भी गंदा करता है. तकनीक का सहारा ले कर धुलाई को इको फ्रेंडली बनाया जा सकता है.

धरती पर करीब सात अरब लोग रहते हैं. रोज अगर हर कोई एक रुमाल भी धोए तो कम से कम 14 अरब लीटर पानी की जरूरत पड़ेगी. धुलाई के बाद यह गंदा पानी नदी, नालों में मिल जाता है. यह उदाहरण संकट की तस्वीर उकेरता है. पेयजल की कमी और गंदी नदियों की समस्या से लड़ते देशों के लिहाज से यह और भी भयावह स्थिति है.

ठंडे इलाको में अक्सर कपड़े धोने के लिए गर्म पानी की जरूरत पड़ती है. इसके लिए अथाह ऊर्जा भी चाहिए. ऐसे में धुलाई के इको फ्रेंडली तरीके खोजने होंगे. जर्मनी के बवेरिया प्रांत की एक लॉन्ड्री ने कुछ ऐसी ही कोशिशें की हैं.

कोबुर्गर हैंडटावल एंड मैट सर्विस में हर दिन तौलियों, चादरों और कालीनों की औद्योगिक स्तर पर धुलाई होती है. 60 डिग्री की गर्मी में होने वाली इस धुलाई के लिए ऊर्जा भी चाहिए और खूब पानी भी. यहां धुलाई सीवेज से साफ किये पानी से की जाती है. लॉन्ड्री मास्टर योखेन क्राउस का दावा है कि कालीन बढ़िया ढंग से साफ होती हैं, "हम चाहते हैं कि पानी में जो ऊर्जा बची हो, जो रसायन बचे हों और इसकी गर्मी, इस सब का दोबारा इस्तेमाल करें, जिस हद तक हो सके. ताकी हमारे पैसे भी बचें और यह काम टिकाऊ भी हो."

टिकाऊ क्लीनिंग सर्विस

धुलाई के लिए पानी और गर्मी, ये दोनों महंगे लेकिन जरूरी संसाधन हैं. अगर थोड़े से पानी में अच्छी धुलाई की जाए तो पानी का खर्च भी बचेगा और उसे गर्म करने में लगने वाली बिजली भी बचेगी. क्राउस कहते हैं, "यहां हम धुलाई से निकला गंदा पानी जमा करते हैं और फिर इन टंकियों में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जिससे धूल कंकड़ निकल जाएं और पानी को दोबारा धोने में लगाया जा सके."

Symbolbild Hände und Wasser

गंदे पानी के इस्तेमाल से पैसे की बचत

पर्यावरण के लिए बेहतर टिकाऊ विकास बदलती दुनिया में जरूरी हो गया है. बवेरिया की यह लॉन्ड्री इसी के चलते कई पुरस्कार जीत चुकी है. घर घर जाती इस क्लीनिंग सर्विस के 1,800 ग्राहक हैं. इनमें कई होटल भी हैं. एक गेस्ट हाउस की मालकिन पामेला वेबर कहती हैं, "हमारे लिए टिकाऊ विकास अहम मुद्दा है. हम अपने यहां पर्यावरण संरक्षण का बेहद ध्यान रखते हैं. हम अपने पार्टनर भी टिकाऊ विकास और पर्यावरण के लिहाज से चुनते हैं."

संसाधन बचाने के लिए कई छोटे छोटे कदम उठाए गए हैं. कंपड़ों को रोलर से सुखाने के दौरान पैदा होने वाली गर्मी से कंपनी इस हॉल को गर्म रखती है. इसके लिए कंपनी ने 25 लाख यूरो का निवेश किया है. अब पैसा वसूल भी होने लगा है. क्राउस कहते हैं, "इससे हमें साल में 8.5 लाख यूरो की बचत हुई. इस तरह बीस लाख यूरो वापस आ चुके हैं. इतनी अच्छी रिफाइनैंसिंग तो आपको किसी बैंक से भी नहीं मिलेगी."

भविष्य में क्राउस धुलाई के बाद बचे पानी को साफ कर पीने लायक भी बनाना चाहते हैं. लॉन्ड्री को पूरी तरह इको फ्रेंडली बनाने की राह में बस यही कदम बाकी है.

रिपोर्ट: इंगा सीग/ओएसजे

संपादन: ईशा भाटिया

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