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मनोरंजन

धरोहर बने बीयर नियम

जर्मन बीयर की कामयाबी के पीछे 500 साल पुरानी एक सच्ची घटना है. 16वीं शताब्दी में कुछ बीयर बनाने वालों ने मिलकर शुद्धता के नियम बनाए. ये नियम आज भी जारी हैं और अब इन्हें सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा देने की मांग हो रही है.

बीयर बनाने वाले संघ, जर्मन ब्रूवर्स फेडरेशन ने 16वीं शताब्दी के बीयर शुद्धता कानून को "अप्रत्यक्ष सांस्कृतिक धरोहर" का दर्जा देने की मांग की है. यह दर्जा देने का अधिकार यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र के पास ही है. संघ की मांग का समर्थन करते हुए जर्मनी के सांस्कृतिक मामलों के मंत्रालय ने पिछले हफ्ते ही "बीयर प्यूरिटी लॉ" को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में लिस्ट कराने के लिए भेजा है.

दुनिया भर में जर्मनी की बीयर को सबसे ज्यादा शुद्ध माना जाना है. इसमें न तो कोई रसायन होता है और न ही कोई बाहरी मिलावट. इस परंपरा की शुरुआत 500 साल पहले जर्मन राज्य बवेरिया में हुई. 16वीं शताब्दी में बवेरिया के बीयर उत्पादकों ने तय किया कि वे सिर्फ प्राकृतिक चीजों से ही बीयर बनाएंगे और उसके स्वाद से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करेंगे.

Sprachbar Deutschkurse Biersorten im Glas

अलग अलग तरह की बीयर, बाएं से वाइत्सेन, गिनेस, पिल्स, डुंकल और कोल्श

कुछ इतिहासकारों के मुताबिक 23 अप्रैल 1516 को बने इस नियम को "राइनहाइट्सगेबोट" (जर्मन में शुद्धता कानून) नाम दिया गया. इसके तहत बीयर बनाने के लिए सिर्फ पानी, जौं, होप्स पौधे और खमीर का ही इस्तेमाल करने पर सहमति बनी. इसे दुनिया का सबसे पुराना फूड क्वालिटी नियम भी कहा जाता है. जर्मन बीयर उद्योग आज भी इसे अमल में ला रहा है.

जर्मन ब्रूवर्स फेडरेशन ने एक बयान जारी कर कहा है कि 500 साल पुराने नियम को एक परंपरा मानकर उसे यह दर्जा देना "सराहना और प्रेरणादायी संकेत" होगा.

अप्रत्यक्ष सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने की शुरुआत यूनेस्को ने 2003 से की. जर्मनी इसी साल इस मुहिम का सदस्य बना है. अप्रत्यक्ष सांस्कृतिक धरोहरों में अपनी परंपराओं को शामिल कराने के लिए सदस्य देशों के पास नवंबर तक का समय है. जर्मन बीयर से जुड़े दावे पर फैसला 2016 तक आने की उम्मीद है.

ओएसजे/एमजी (डीपीए)

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